नई दिल्ली. आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद से घाटी में उपद्रव का दौर चल पड़ा था. बीते एक महीने से ज्यादा समय से घाटी में कर्फ्यू लगा है. इसी बीच सरकार के प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर विवाद भी छिड़ गया है. इसलिए गृह मंत्रालय का एक एक्सपर्ट पैनल पैलेट गन की जगह PAVA शेल्स के इस्तेमाल पर विचार कर रहा है. पावा शेल मिर्ची के गोले हैं, जिससे ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचता.
 
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घाटी में बीते 49 दिनों से जारी अशांति और हिंसा के दौर में पत्थरबाजी और प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के लिए सुरक्षाबल पैलेट गन का इस्तेमाल कर रहे हैं. ये छोटे-छोटे धातु के छर्रे होते हैं, जो शरीर में जाकर चुभ जाते हैं. इस ओर विवाद तब गहराया जब पैलेट गन से घायल कई लोगों के आंखों की रोशनी तक खोने की बात सामने आई.
 
सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्रालय की एक्सपर्ट कमिटी मिर्ची के गोलों को धातु के छर्रे के विकल्प के रुप में देख रही है. हालांकि अभी इस पर कोई निर्णय लेना बाकी है. गृह मंत्रालय के कुछ अधिकारियों, बीएसफ, सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस, आईआईटी-दिल्ली और ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड के 7 सदस्यों वाली कमिटी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विकल्प तलाश रही है. यह पैनल जल्द ही एक अपनी रिपोर्ट सौंपेगा, जिसके बाद आखि‍री फैसला लिया जाएगा. 
 
इन पावा शेल्स को साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) के तहत लखनऊ स्थित प्रयोगशाला में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च ने विकसित किया था. अधिकारियों ने बताया कि पावा गोले IITR में एक साल से भी ज्यादा समय से ट्रायल में हैं.