अहमदाबाद. चुनावी मौसम और गुजरात में बढ़ते दलित जनाक्रोश के कारण गुजरात सरकार को 2012 में पुलिस की फायरिंग में मारे गए तीन दलितों की याद आ गई है. आखिरकार 4 साल बाद सरकार ने इस हत्याकांड की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है. बता दें कि गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले के थांगद में पुलिस की फायरिंग में तीन दलितों की मौत हो गई थी. 
 
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दलित नेताओं के दबाव में सरकार ने विशेष अदालत का गठन करने और मामले में तेजी लाने के लिए विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति करने का भी निर्णय किया है. सरकार ने मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के परिजन को दो़-दो लाख रूपये अतिरिक्त मुजावजा देने का भी निर्णय किया है जो पहले के मुआवजे के अतिरिक्त होगा. बता दें कि उना शहर में दलितों को पीटे जाने की घटना के बाद थांगद पुलिस गोलीबारी मामला प्रकाश में आया. 
 
सरकार की तरफ से जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि दलित नेताओं के आग्रह पर मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने एसआईटी गठित करने का निर्णय किया. विज्ञप्ति में राज्य के गह मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा के हवाले से कहा गया, मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कैबिनेट मंत्री आत्माराम परमार, पूर्व मंत्री रमन लाल वोरा और राज्यसभा सदस्य शंभूप्रसाद टुंडिया सहित दलित नेताओं के आग्रह पर यह निर्णय किया. 
 
 
 
 
 

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