नई दिल्ली. बलूचिस्तान पर भारत के रुख का बलूच नेताओं ने जमकर समर्थन किया है. बलूच नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि बलूचिस्तान का मामला अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए हम पीएम मोदी का शुक्रिया अदा करते हैं. बता दें कि पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में पाक विरोधी नारे लग रहे हैं. 
 
इनख़बर से जुड़ें | एंड्रॉएड ऐप्प | फेसबुक | ट्विटर
 
वर्ल्ड बलूच वूमेंस फोरम की प्रमुख नाइला कादरी ने कहा कि पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) और बलूचिस्तान के लोगों के समर्थन करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हम शुक्रिया अदा करते हैं. आपने गिलगित-बाल्टिस्तान और PoK के लोगों की दिक्कत समझने की कोशिश की. उम्मीद है कि आप सितंबर में होने वाले संयूक्त राष्ट्र की बैठक में जरूर उठाएंगे.
 
 
वहीं बलूच नेशनल मूवमेंट के प्रवक्ता हम्माल हैदर ने कहा कि पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने बलूचिस्तान के लोगों के समर्थन किया है जो कि बड़ा फैसला है. बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई में समर्थन देने के लिए हम पीएम मोदी के बयान का समर्थन करते हैं. 
 
 
बलूचिस्तान के नेता बी. बुग्ती ने पीएम मोदी के बयान का स्वागत किया है. उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि हम भारतीय प्रधानमंत्री के बयान की तारीफ करते हैं. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और जिम्मेदार पड़ोसी होने के नाते भारत को बलूचिस्तान मामले में दखल देना चाहिए.
 
 
क्या कहा था PM मोदी ने
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर मामले पर आयोजित सर्वदलीय बैठक में पाकिस्तान को करारा संदेश देते हुए कहा कि PoK भी भारत के जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है. PoK और बलूचिस्तान में वहां के सुरक्षाबलों द्वारा लोगों पर किए जा रहे अत्याचारों को दुनिया के सामने लाने की जरूरत है. 
 
 
‘भारत UN में उठाए बलूचिस्तान का मसला’
बलूचिस्तान में पाकिस्तान से परेशान मानवाधिकार कार्यकर्ता मर्री ने ट्वीट किया है कि भारत को इस समस्या से निपटने में हमारी मदद करनी चाहिए. मर्री ने लिखा है कि अगर पाकिस्तानी अधिकारी कश्मीर में रहने वाले नेताओं से मिल सकते हैं तो फिर भारत के अधिकारी क्यों नही मिल सकते? बलोच नेता ने कहा है भारत को मानवाधिकार हनन का यह मामला संयुक्त राष्ट्र में उठाना चाहिए. 
 
Stay Connected with InKhabar | Android App | Facebook | Twitter
 
चीन से परेशान बलूचिस्तानी
प्रर्दशनकारियों के विरोध की एक वजह पाकिस्तान के इस शहर पर चीन का बढ़ता प्रभाव भी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि चीन और पाकिस्तान इस क्षेत्र में मौजूद संसाधनों का सिर्फ अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं.

 

देश और दुनिया की ताजातरीन खबरों के लिए हमे फॉलो करें फेसबुक,गूगल प्लस, ट्विटर पर और डाउनलोड करें Inkhabar Android Hindi News App