विजयवाड़ा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सख्ती का कथित गौ-रक्षकों पर इसका असर नजर नहीं आ रहा है. गुजरात के ऊना जैसा मामला आंध्र प्रदेश के अमलापुरम शहर से सामने आया है. जहां मरी गाय की खाल उतार रहे दो दलित भाईयों को आठ कथित गौरक्षकों ने गाय की खाल निकालने के आरोप में पेड़ से बांधा और जमकर पिटा. दोनों दलित भाई मादिगा समुदाय से आते हैं.
 
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राज्यसभा में उठा पिटाई का मामला
आंध्र प्रदेश में दलितों की पिटाई का मामला राज्यसभा में भी गूंजा. बीएसपी सांसद सतीश चंद्र मिश्र ने ये मामला उठाया और केंद्र सरकार से जवाब मांगा. 
 
 
करंट लगने से हुई थी गाय की मौत
पुलिस के मुताबिक गाय की मौत करंट लगने से हुई थी. गाय को दफनाने से पहले इसके मालिक ने मोकाती एलिशा और लाजर नाम के दो दलित भाइयों को खाल उतारने के काम पर लगाया था. खाल उतारने की खबर लगते ही गौ-रक्षक दल के लोग वहां पहुंचे और दोनों भाइयों पर गो-हत्या का आरोप लगाकर जमकर पिटाई कर दी.
 
 
SC\ST एक्ट के खिलाफ मामला दर्ज
पीड़ितों को इलाज के लिए अमलापुरम के एक हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है. पुलिस का कहना है कि अज्ञात लोगों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है. दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि बाकी की तलाश की जा रही है. 
 
 
क्या है ऊना मामला?
गुजरात के ऊना के एक गांव में 11 जुलाई को कथित गौरक्षकों ने दलित समुदाय के चार लोगों की बेहरमी से पिटाई की थी. उसका वीडियो सामने आने पर गुजरात के कई शहरों में हिंसक प्रदर्शन हुई. इसके बाद पूरे गुजरात में दलितों ने मरी हुई गाय को उठाने से इंकार कर दिया था. राज्य सरकार ने पूरे मामले की सीआईडी जांच के ऑर्डर दिए और अब तक 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल और सीएम आनंदीबेन पटेल समेत कई नेता पीड़ितों से मिले थे.

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