अहमदाबाद. गुजरात के ऊना में गोरक्षा के नाम पर दलितों पर किए गए बर्बर हमले के विरोध में शुक्रवार से दलित समुदाय ने दलित पदयात्रा शुरू कर दी है. अहमदाबाद से शुरू होने वाले पदयात्रा 15 अगस्त को ऊना में खत्म होगी. पदयात्रा के ऊना पहुंचने पर दलित स्वतंत्रता दिवस बनाया जाएगा. रैली में दलित समुदाय के लोगों से अपील की गई कि वे अब पशुओं के शव उठाने का काम छोड़ दें.
 
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दलित संगठन के प्रमुख दलपत भाई भाटिया ने कहा है कि अगर दलित समुदाय पर अत्याचार नहीं रुका तो 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में वो अपनी ताकत दिखाएंगे. उन्होंने आगे कहा कि ऊना घटना को लेकर पूरे राज्य के दलित काफी दुखी हैं. दलित समाज अन्याय का शिकार हो रहा है. यहां लोगों को झूठे आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन काम कोई नहीं करता है. 
 
 
उना की घटना के पीड़ितों के परिजन भी इस रैली में शामिल हुए. पीड़ितों के भाई जीतू सरवैया ने कहा कि जब ये घटना हुई तो मुझे बहुत दुख हुआ और गुस्सा भी आया. लगा कि मैं भी हथियार लेकर जाऊं और उन पर हमला कर दूं, लेकिन आज ये देखकर संतोष है कि मेरे चाचा और भाइयों पर जो अत्याचार हुआ, उसने पूरे दलित समाज को अपने पर हो रहे अत्याचार को लेकर एकजुट कर दिया है.
 
 
बता दें कि गुजरात के ऊना में गोहत्या के आरोप में चार दलित युवकों की बेरहमी से पिटाई कर दी गई. जिसके विरोध में दलित समाज के लोगों का गुस्सा गुजरात में देखने को मिला. राजकोट में दो स्थानों पर 5 दलित युवकों ने आत्महत्या करने का प्रयास किया. वहीं सुरेंद्र नगर में विरोधस्वरुप लोगों ने मरी हुई गायों को लाकर डीएम ऑफिस में पटक दिया था. इस घटना के बारे में लोगों को कहना था कि जिस गाय की चमड़ी वे निकाल रहे थे वह पहले से ही मरी हुई थी.

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