नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट अब ये तय करेगा कि किसी सरकारी नौकरी करने वाले शख्स की अगर रिटायमेंट से पहले मौत हो जाने पर उसकी शादीशुदा बेटी नौकरी पाने की हकदार है या नहीं ?  
 
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सुप्रीम कोर्ट ने 2015 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है जिसमें कहा गया था कि शादीशुदा बेटी भी परिवार का हिस्सा होती है और वो पिता की जगह नौकरी पाने की हकदार है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
 
दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. मामला यूपी के चंदौली इलाके का है. 2015 में फायर ब्रिगेड में काम करने वाले आदित्य कुमार श्रीवास्तव की मौत हो गई थी. परिवार में पत्नी के अलावा सात बेटियां थी.
 
बडी बेटी नेहा बालिग होने के साथ साथ शादीशुदा थी. उसने यूपी सरकार के पास पिता की नौकरी की अर्जी लगाई लेकिन सरकार ने रूल 1974 का हवाला देते हुए कहा कि नियमों के मुताबिक शादीशुदा बेटी ‘परिवार’ की श्रेणी में नहीं आती. पिता की जगह सिर्फ उनके आश्रित परिजनों को ही नौकरी दी जा सकती है. 
 
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नेहा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में अर्जी लगाई लेकिन हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया. लेकिन डबल बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश को पलटते हुए आदेश दिए कि शादीशुदा बेटी भी परिवार का हिस्सा होती है और उसे नौकरी दी जानी चाहिए. इसी को लेकर यूपी सरकार सुप्रीम कोर्ट आई है. सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाकर नेहा को नोटिस जारी किया है.
 

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