नई दिल्ली. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पूर्व प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार की ज़मानत याचिका पर पटियाला हाउस कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. 25 जुलाई को 4 बजे कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी. जिसके बाद ये तय हो जायेगा कि राजेंद्र कुमार को जेल मिलेगी या बेल.
 
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शनिवार को मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कहा राजेंद्र कुमार को ज़मानत का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें जमानत नहीं दी जानी चाहिए. सीबीआई ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि आरोप बेहद गंभीर है. अगर इनको ज़मानत दी जाती है तो वो सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते है. इतना ही नहीं जिन गवाहों के बयान अभी दर्ज होने वाले है उनको ये प्रभावित और धमका सकते है ऐसे में इनको ज़मानत नहीं दी जा जानी चाहिए.
 
सीबीआई में कहा कि मामले की जाँच चल रही है. इतना ही नहीं रिश्वत की रकम अलग-अलग खातों से होकर गई है जिसकी बारे में अभी पता लगाया जा रहा है. राजेंद्र कुमार, कंपनी के बीच में कई ईमेल किये है. कंपनी को कॉन्ट्रेक्ट मिलने के बाद एक अधिकारी ने कंपनी की योग्यता पर सवाल उठाये थे लेकिन राजेंद्र कुमार ने कंपनी का पक्ष लिया था. ये सब बताता है कि किस तरफ से पूरी वारदात को अंजाम दिया गया.
 
इसके साथ ही ऑडियो रिकॉर्डिंग है. जिसमें राजेंद्र कुमार और दूसरे लोगों की बातचीत है. राजेंद्र कुमार, अशोक कुमार को बराबर निर्देश दे रहे थे. साजिश को 3 डिजाइन तरीके से अंजाम दिया गया. कंपनी को बिना कुछ किये ही कॉन्ट्रैक्ट मिल गया. जिससे पता चलता है कुमार ने कंपनी को फ़ायदा पहुँचाया है.
 
वही पूर्व प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार की तरफ से दलील दी गई कि जाँच के लिए अब उनकी जरूरत नहीं है. ऐसे में अदालत उनको ज़मानत दे दे. ये कहा कि उन्होंने जाँच में हमेशा सहयोग किया है. मामले की जाँच पिछले सात महीने से चल रही है और उन्हें जब भी सीबीआई ने पूछताछ के लिए बुलाया है वो गए है इस लिए ये आरोप गलत है कि उन्होंने सहयोग नहीं किया. अगर सीबीआई को गिरफ्तार ही करना था तो सात महीने पहले क्यों नहीं किया 4 जुलाई को क्यों.
 
राजेंद्र कुमार ने सीबीआई पर आरोप लगाया कि ये पूरी करवाई दुर्भावना से प्रेरित है. जिस कंपनी को फायदा पहुँचाने का आरोप लगाया है उसमें न तो में और न ही परिवार का कोई सदस्य उससे जुड़ा है. वो 18 दिनों से जेल में है इस लिए उनको ज़मानत दे देनी चाहिए.
 
वही एक नई अर्जी दाखिल करते हुए राजेंद्र कुमार की तरफ से कहा गया कि उनको हाईबीपी की शिकायत है साथ ही उनकी लड़की की तबियत है. इतना ही नहीं ये भी गया कि उनके परिवार में कोई पुरुष सदस्य नहीं है, ऐसे में स्वास्थ्य के आधार पर उनको जमानत दी जाये.
 
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अरविंद कुमार ने एजीएमयूटी कैडर के 1989 बैच के आईएएस अधिकारी कुमार, केजरीवाल के कार्यालय के पूर्व उप-सचिव तरूण शर्मा, कुमार के करीबी सहयोगी अशोक कुमार और एक निजी कंपनी के मालिक संदीप कुमार एवं दिनेश कुमार गुप्ता फ़िलहाल तिहाड़ जेल में बंद है.

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