नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए चुनाव आयोग से सवाल किया है कि कोर्ट के फैसले को लागू करने में कोताही क्यों बरती जा रही है. कोर्ट ने कहा कि जब अदालत किसी सांसद और विधायक को किसी आपराधिक मामले में दोषी करार देने के बाद दो साल से ज्यादा की सजा देती है तो ऐसे में उनकी सदस्यता तुरंत क्यों नहीं रद्द की जा रही है.
 
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शीर्ष अदालत के मुख्य न्यायधीश जस्टिस टीएस ठाकुर ने चुनाव आयोग से सवाल किया है कि कोर्ट के आदेशों का पालन करने में देरी क्यों की जा रही है.
 
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी. जिसमें कहा गया था कि कोर्ट के ऑर्डर के बाद भी चुनाव आयोग ढिलाई बरत रहा है. बहुत से ऐसे मामले हैं जिसमें सांसद और विधायक को आपराधिक मामलों में दोषी करार दिए जाने के बाद दो साल से ज्यादा की सजा हुई लेकिन तत्काल प्रभाव से उनकी सदस्यता रद्द नहीं की गई. इसी मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह सवाल चुनाव आयोग से किया है.
 
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साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि किसी आपराधिक मामले में अगर किसी सांसद को दोषी पाया जाता है और 2 साल से ज्यादा की सजा दी जाती है तो ऐसे में उसकी सदस्यता रद्द की जानी चाहिए. इसके अलावा कोर्ट ने यह भी कहा था कि सजा पूरी कर लेने के बाद भी सांसद या विधायक को अगले 6 सालों तक चुनाव नहीं लड़ने दिया जाएगा.
 

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