नई दिल्ली. गुजरात में गोरक्षा दल के लोगों के हाथों दलित युवकों की पिटाई का मामला राजनीतिक लिहाज से इतना गंभीर हो चुका है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को हिन्दू समाज में विभाजन नज़र आने लगा है. संघ ने घटना के करीब 10 दिन बाद चुप्पी तोड़ी और कहा कि गोरक्षा के नाम पर अपने ही समाज के लोगों पर अत्याचार जघन्य अपराध है.
 
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संघ ने बयान जारी करके जाति के आधार पर होने वाले किसी भी प्रकार के भेदभाव, अन्याय या अत्याचार की कड़ी निंदा है. संघ ने गुजरात की घटना की निंदा करते हुए कहा है कि गोरक्षा के नाम पर अपने ही समाज के लोगों के साथ इस प्रकार का अमानवीय व्यवहार जघन्य अपराध है.
 
संघ ने कहा है कि इस तरह की आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों को कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए. संघ ने कहा है, “अपने समाज के अभिन्न अंग अनुसूचित जाति के बंधुओं के साथ समय-समय पर होने वाली ऐसी घटनाएं संपूर्ण समाज के लिए गंभीर चिंता और चिंतन का विषय हैं.”
 
 
संघ ने बगैर हिन्दू समाज या हिन्दू शब्द का इस्तेमाल करते हुए एकजुटता की बात की है और कहा, “अपना समाज एक है और उसके सारे घटकों मे परस्पर स्नेह, आत्मीयता और बंधुभाव बना रहे, ये देखना हम सबका कर्तव्य है.” संघ ने सरकार और समाज के वरिष्ठ लोगों से शांति और सौहार्द का माहौल बनाने की अपील की है.
 

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