नई दिल्ली. यूनेस्को ने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेष को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल कर लिया गया है. शुक्रवार को करीब दो बजे यूनेस्को ने अपनी वेबसाइट पर जब इसे शामिल किया तो विश्व के प्रथम विश्वविद्यालय नालंदा की खोई प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई मिली. यूनेस्को नेशंस एजुकेशनल, साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गनाइजेशन (यूनेस्को) ने महाबोधि मंदिर के बाद बिहार के दूसरे स्थल नालंदा के खंडहर को विश्व धरोहर में शामिल किया है. विश्व धरोहर में शामिल होने वाला यह भारत का 33 वां धरोहर है.
 
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वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल होने से यहां आने वाले सैलानियों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि होगी. सैलानियों को मिलने वाली सुविधाओं में बढ़ोतरी के साथ ही सुरक्षा व्यवस्था पहले की अपेक्षा अधिक चुस्त होगी. धरोहर के संरक्षण पर पहले से अधिक खर्च किये जाएंगे. कर्मियों की संख्या बढ़ेगी. साइट के कम से कम दो किलोमीटर दूरी को बफर जोन घोषित किया गया है. इसके विकास, सुरक्षा व संरक्षण की जिम्मेवारी आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और बिहार सरकार की होगी.
 
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बोधगया से 62 किलोमीटर व पटना से 90 किलोमीटर दक्षिण में -14 हेक्टेयर में फैले हैं विश्वविद्यालय के अवशेष. पांचवी से बारहवीं शताब्दी में नालंदा बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन चुका था. सातवीं शताब्दी में ह्वेनसांग भी यहां अध्ययन के लिए आया था.
 
 

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