नई दिल्ली. केरल के सबरीमला मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सख्त टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि मंदिर में महिलाओं को न जाने देना उनके मौलिक अधिकारों के उल्लंघन है. क्योंकि संविधान से लेकर वेद, उपनिषद कोई भी महिला और पुरुष में भेदभाव नहीं करते. बता दें कि केरल के इस मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध है. 
 
इनख़बर से जुड़ें | एंड्रॉएड ऐप्प | फेसबुक | ट्विटर
 
सोमवार को इसे चुनौती देने वाली याचिका पर जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई की. तीन सदस्यीय बेंच ने कहा कि मंदिर पूजा का सार्वजनिक स्थल है. यहां महिलाओं को प्रवेश करने से नहीं रोका जा सकता. कोर्ट ने कहा कि ये गंभीर मामला है महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर प्रतिबंध कैसे लगाया जा सकता है. सुनवाई के दौरान मंदिर बोर्ड ने जवाब के लिए वक्त मांगा है. उसने इस मामले को संविधान पीठ को सौंपे जाने की मांग भी की. 
 
Stay Connected with InKhabar | Android App | Facebook | Twitter
 
मंदिर बोर्ड की इस मांग पर जस्टिस मिश्रा ने कहा कि उनकी बेंच यह मामला संविधान पीठ को सौंपने पर विचार कर सकती है. यदि वह ऐसा करेगी तो इससे पहले इस मामले में विस्तार से फैसला देगी. इसके बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई सात नवंबर को होगी.
 
 
 
 

देश और दुनिया की ताजातरीन खबरों के लिए हमे फॉलो करें फेसबुक,गूगल प्लस, ट्विटर पर और डाउनलोड करें Inkhabar Android Hindi News App