नई दिल्ली. कश्मीर घाटी के हालात से निपटने के लिए मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के तरीके से नाराज है. सूत्रों के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने महबूबा से मुलाकात के लिए दिल्ली बुलाया है. वहीं गृह सचिव ने जम्मू-कश्मीर के टॉप अधिकारियों से तीन बार बात की लेकिन उन बातों का परिणाम अब तक दिखाई नहीं दे रहा है.
 
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CM ने मामले वापस लिए
वहीं महबूबा मुफ्ती ने सोमवार को श्रीनगर में सुरक्षा अधिकारियों के साथ एक बैठक की. इसमें उन्होंने पुलिस और गृह विभाग को आदेश दिए कि वो उन युवाओं के मामलों की दोबारा जांच करें जिन पर पत्थरबाजी के मामले दर्ज हैं. एक दिन बाद गृह विभाग ने 634 युवकों पर दर्ज पत्थरबाजी के 114 मामले वापस ले लिए. इन पर आरोप थे कि इन्होंने सुरक्षाबलों पर पत्थर फेंके हैं.
 
 
बनाई गई थी कमेटी
पत्थरबाजी के आरोप में दर्ज मामलों की छानबीन के लिए सरकार ने तीन सदस्यों की कमेटी बनाई थी. इस कमेटी की सिफारिशों को पुलिस को भेजा और उनके मुताबिक कार्रवाई करने को कहा गया. कमेटी ने साफ किया है कि जिन पत्थरबाजों के खिलाफ खतरनाक आपराधिक मामले होंगे, उन्हें इस दायरे में नहीं लाया जाएगा.
 
 
BJP ने किया विरोध
दूसरी ओर, महबूबा सरकार में साझीदार बीजेपी ने महबूबा मुफ्ती के इस फैसले की निंदा की है. जम्मू-कश्मीर बीजेपी के मुखिया और विधायक सतपाल शर्मा कहते हैं, जम्मू कश्मीर में पिछले 25 साल से आंतकवाद की जो आग लगी है उसमें चाहे आतंकवादी हों, या अलगावादी, सभी ने आग में घी डालने का काम किया है. उन्होंने जम्मू-कश्मीर में खून खराबा किया है. ऐसे में ये पत्थरबाज हमारे जवानों को जख्मी करते हैं, हालात खराब करते हैं. इनको छोडऩा कोई अच्छा संकेत नहीं है. आने वाले दिनों में ये हमारे लिए सरदर्द बनेंगे.
 
 
ये है मामला
बता दें कि आतंकी सगंठन हिजबुल मुजाहिद्दीन का कमांडर बुरहान वानी जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एनकाउंटर में मारे जाने के बाद श्रीनगर में अलगावादियों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया. इस विरोध प्रदर्शन में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प में 21 लोगों की मौत हो गई है और 100 जवानों समेत 300 से ज्यादा जख्मी हो गए हैं.

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