नई दिल्ली. इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ जाकिर नाइक के भाषणों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शूरू कर दी है. दरअसल एक खबर के अनुसार ढाका हमले का एक आतंकवादी जाकिर नाइक के भाषणों से प्रभावित था और उन्हें अपना आदर्श मानता था. एक आतंकी ने सोशल साइट्स पर जाकिर का एक बयान शेयर किया था जिसमें कहा गया था कि सभी मुस्लमानों को आतंकवादी होना चाहिए. 
 
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एनआईए ने जाकिर नाईक की तकरीरों की पड़ताल शुरू कर दी है. इस बात की जांच की जा रही है कि कहीं इस्लाम के नाम पर भाषण देने वाले जाकिर अपने भाषणों के जरिए लोगों को आतंक के रास्ते पर तो नहीं ढकेल रहे हैं. एटीएस और एनआईए ने बताया कि अभी उनके पास जाकिर नाइक को लेकर किसी तरह का ठोस सबूत नहीं है और अभी नाइक के भाषणों की प्रमाणिकता की जांच की जा रही है.
 
 
इस बीच जाकिर नाइक के इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के एडमिनिस्ट्रेशन मैनेजर मंजूर शेख ने बताया कि मुझे ऊपर से आदेश मिला है कि अभी किसी तरह की प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करनी है. बांग्लादेश के हमलावरों के सवाल पर शेख ने कहा कि कुरान में लिखा है कि किसी बेगुनाह को मार नहीं सकते.
 
कब-कब आया नाम

2009 में न्यूयोर्क के सबवे में फिदायीन हमले की साजिश रखने के आरोप में गिरफ्तार नजीबुल्ला जाजी के दोस्तों ने बताया कि वो काफी वक्त तक डॉ नाईक की तकरीरों को टीवी पर देखता था.

2006 में मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में आरोपी राहिल शेख भी डॉ. नाइक से प्रभावित था.

2007 में बैंगलोर का एक शख्स कफील अहमद ग्लासगो एयरपोर्ट को उडाने की कोशिश करते हुए घायल हो गया. जांच में पता चला कि जिन लोगों की बातों से वो प्रभावित था उनमें से डॉ जाकिर नाइक भी एक थे.

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यही नहीं हाल ही में हैदराबाद में गिरफ्तार आईएस के 5 लोगों का सरगना इब्राहीम यजदानी न सिर्फ डॉ जाकिर से प्रभावित था बल्कि 2010 में वो उनके कैंप में शामिल हुआ था.