नई दिल्ली. परिवार जब बिखरता है तो बच्चे दो राहे पर और उनका भविष्य अधर में लटक जाता है. एक ऐसे ही मामले की सुनवाई गुरुवार को देश की सबसे बड़ी अदालत में हुई. साढ़े सात साल की मासूम बच्ची अदालत के चौखट पर न्याय की आस लगाये हुए आई थी. अदालत के एक कोने में उसकी माँ खड़ी थी तो दुसरे कोने में वो अपने पापा के साथ.
 
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मामला बच्चे की कस्टडी को लेकर
अग्नि के सामने सात जन्मों तक साथ निभाने का वादा करने वाले कुछ साल भी साथ न बिता सके. तलाक़ से शुरू हुआ मामला साढ़े सात साल की मासूम बच्ची के कस्टडी तक पहुँच गया. पिता ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनोती दी जिसमें कोर्ट ने सात दिनों के लिए मासूम बच्ची की कस्टडी माँ को दी थी.
 
गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान पिता की तरफ से कहा गया कि बच्ची की माँ उस पर अत्याचार करती है उसको चाक़ू से डराती है. जिस पर कोर्ट ने नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा कि माँ कुछ भी हो सकती है लेकिन अपने बच्चे के लिए निर्दयी नहीं हो सकती.
 
तब पिता की तरफ से कहा गया कि आप बच्ची से ही पूछ ले तब कोर्ट ने पिता को फटकार लगाते हुए कहा कि अगर बच्ची माँ के पास भी कुछ महीने रह ले तो वो आपके ख़िलाफ़ भी कहेगी. कोर्ट ने कहा माँ के खिलाफ बच्ची के दिमाग में नफ़रत मत डालो. 
 
पुरे मामले की सुनवाई तकरीबन 15 मिनट तक सुप्रीम कोर्ट में चली. इस दौरान बच्ची रोये जा रही थी. मासूम के आँसू कोर्ट रूम में मौजूद कई लोगों से नहीं देखे गए और सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद कई लोग बाहर निकल आएं.
 
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तब अदालत ने पिता को कहा बच्ची की तरफ देखिए. जब पिता कुछ और कहना चाहते थे तो अदालत ने साफ़ कहा अगर अब आपने कुछ कहा तो आपको गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. जिसके बाद कोर्ट ने 23 जून तक माँ को कस्टडी देते हुए कहा आप 23 जून को अदालत में पेश होंगे तब हम ये तय करेंगे की भविष्य में बच्चे की कस्टडी किसके पास रहेगी.

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