नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया यानि बीसीआई के उस प्रस्ताव पर रोक लगा दी है जिसमें बीसीआई ने एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड के लिए भी वेरिफिकेशन को अनिवार्य बताया गया था. बीसीआई प्रैक्टिसिंग लॉयर्स के सर्टिफिकेट आदि का वेरिफिकेशन कर रहा है. सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर मामले की तुरंत सुनवाई की मांग की थी। याचिका में कहा गया है कि उन्हें बार काउंसिल ऑफ इंडिया के वेरिफिकेशन से छूट दी जाए.
 
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याचिका में कहा गया है कि उनके मेंबरों को बार काउंसिल ऑफ इंडिया के जांच के दायरे में न लाया जाए, क्योंकि उन्होंने एग्जाम पास कर सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड बने हैं. उन्होंने कहा कि उनके सारे दस्तावेज पहले से कोर्ट के सामने है. एसोसिएशन के वकील ने कहा कि बीसीआई का पहले से एक परंपरा रही है कि सीनियर एडवोकेट और एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड की जांच नहीं की जाती. लेकिन बीसीआई ने प्रस्ताव लाकर उन्हें भी वेरिफिकेशन का दायरे में ले आए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के एडवोकेट से पूछा कि क्या नियम को रिजॉल्यूशन से बदला जा सकता है. बहरहाल अदालत ने सुनवाई के लिए मामले को 30 जून के लिए रख दिया है. 
 
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एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड वो एडवोकेट होते हैं जिनके दस्तखत से ही सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल होती है और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होने वाली याचिका पर दस्तखत करने की पात्रता रखते हैं. हाल ही में बार काउंसिल ने तमाम एडवोकेट का ये वेरिफिकेशन शुरू किया है. आरोप लगाया गया है कि कुछ एडवोकेट फर्जी डिग्री के आधार पर प्रैक्टिस कर रहे हैं जिसके बाद ये अभियान शुरू हुआ है. वहीं एसोसिएशन के एडवोकेट ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि एओआर को तमाम सर्टिफिकेट पेश करने के लिए नहीं कहा जाना चाहिए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा ली गई पेपर के बाद ही वो रजिस्टर्ड हुए हैं. पहले एओआर को छूट थी लेकिन बीसीआई ने पिछले साल नियम में बदलाव किया रिजॉल्यूशन पास कर उन्हें भी जांच के दायरे में ले आए हैं.  

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