नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट में देह व्यापार में शामिल लोगों को लेकर एक बार सख्त हुआ. कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा देह व्यापार लिप्त लोग कैसे उम्मीद कर सकते है कि इस कोर्ट से उनको राहत मिल सकती है और आदेश उनके पक्ष में होगा.
 
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शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से दलील दी गई हाई कोर्ट ने जीबी रोड में किराये पर रही हसीना और रेखा को देह व्यापार में लिप्त पाया और उनको दोषी माना. लेकिन उस घर में कई दूसरी लड़कियां भी रही है जो देह व्यापार में लिप्त नहीं है ऐसे में उनको न निकाला जाये.
 
जिसपर कोर्ट ने इनमोरल ट्रैफिकिंग प्रिवंसन एक्ट की धारा 18 का हवाला देते हुए कहा इस तरह की व्याख्या को सहमित प्रदान करते हैं तो कानून कभी भी लागू नहीं हो पायेगा. कानून की धारा की इस तरह की व्याख्या से अतार्किक, और अवास्तविक होगी.
 
जिसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि उस घर में किराये पर रह रही दूसरी लड़कियों को खाली कराने का नोटिस नहीं दिया. ऐसे में बिना नोटिस दिए खाली कराना सही नहीं होगा.
 
जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा इनमोरल ट्रैफिकिंग प्रिवंसन एक्ट की धारा 18 के तहत कोई भी महिला या व्यक्ति संलिप्त पाया जाता है तो उसको किराये के घर से निकाल बाहर करने का आदेश दिया जा सकता है. ऐसे में उस घर में रहने वाले सभी लोगों को खाली कराने का नोटिस देना जरूरी नहीं है. जिसके बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता की याचिका को ख़ारिज कर दिया.
 
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दरअसल जीबी रोड में देह व्यापार में लिप्त दो महिलाओं को हाई कोर्ट ने दोषी माना था और घर खाली कराने का आदेश दिया था. उस घर में किराये पर रह रही दूसरी महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा था देह व्यापार में लिप्त नहीं है ऐसे में उनको घर से न निकाला जाये. 
 
 
 
 

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