मथुरा. यूपी के डीजीपी जावीद अहमद ने मथुरा में हुई हिंसा के मास्टर माइंड रामवृक्ष यादव की मौत की पुष्टि की थी. रविवार को उसके घरवालों ने शव लेने से इनकार कर दिया है. यूपी पुलिस रामवृक्ष यादव का शव लेकर उसके गांव गाजीपुर लेकर पहुंची थी. न तो घरवाले शव लेने को तैयार हुए और न ही गांव वाले. बता दें कि रामवृक्ष यादव ही इस पूरी हिंसा के लिए जिम्मेदार था. उसी के इशारे पर जवाहर बाग के अंदर मौजूद लोगों ने पुलिस पर हमला किया था. 
 
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320 लोगों की हुई गिरफ्तार
पुलिस ने इलाके से बड़ी मात्रा में गोला बारूद बरामद किया और 320 लोगों को गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक मारे गए लोगों में से 11 की सिलेंडर विस्फोट के चलते झुलसकर मौत हुई थी. अतिक्रमणकारियों ने मौके से हटने से पहले उन झोपड़ियों को आग लगा दी, जहां बम, विस्फोटक और गैस सिलेंडर रखे हुए थे.
 
 
24 लोगों की हुई थी मौत
गुरुवार की देर शाम भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा खून से लाल हो गई. यहां के जवाहरबाग में अतिक्रमण हटाने गई पुलिस टीम पर दंगाईयों ने हमला बोल दिया जिसमें SP सिटी मुकुल द्विवेदी और एक SO संतोष कुमार यादव सहित 24 लोगों की मौत हो गई. जिसमें से 3 पुलिसवाले अभी भी गायब है.  
 
 
कौन है रामवृक्ष यादव?
मथुरा में हुए बवाल का मुख्य आरोपी रामवृक्ष गाजीपुर के मरदह ब्लॉक के रायपुर बाघपुर गांव का रहने वाला था. 15 मार्च 2014 में वो करीब 200 लोगों को लेकर मथुरा आया था.  उसने यहां पर 2 दिन रहने के लिए प्रशासन से अनुमति मांगी थी लेकिन दो दिन बाद वो वहां से हटा नही. पहले तो रामवृक्ष यहां एक झोपड़ी बनाकर रहने लगा फिर धीरे-धीरे वहां कई झोपडियां बन गईं. देखते ही देखते रामवृक्ष ने 270 एकड़ में अपनी सत्ता चलाने लगा. रामवृक्ष इनता ताकतवर हो गया कि प्रशासन भी इसका कुछ नहीं कर सकी. इमरजेंसी के दौरान 1975 में जेल में बंद भी रहा. रामवृक्ष को यूपी सरकार की ओर से लोकतंत्र सेनानी का पेंशन भी मिलता है. रामवृक्ष की दो बेटी और दो बेटे हैं.
 
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