नई दिल्ली. मर्सिडीज हिट एंड रन मामले में आरोपी नाबालिग को नाबालिग न मानकर उसे एडल्ट के तौर पर मुकदमा चलाने की मांग की गई है. दिल्ली पुलिस कि याचिका पर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड शनिवार को फैसला सुनाएगा. शुक्रवार को सभी पक्षों को सुनने के बाद जुवेनाइल जस्टिुस बोर्ड (जेजेबी) ने फैसला सुरक्षित रख लिया. 
 
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दिल्ली पुलिस ने अपनी अर्जी में कहा है कि नाबालिग ने 4 अप्रैल को सिद्धार्थ शर्मा को मर्सिडीज कार से टक्कर मारी तब उसकी उम्र 18 साल से मात्र 4 दिन ही कम थी. ऐसे में उसे नाबालिग के तौर पर नहीं, बल्कि एडल्ट के तौर पर समझा जाना चाहिए. जिससे कि मामले में पीड़ित परिवार के साथ सही न्यामय हो सके.
 
आरोपी को इस गंभीर अपराध के लिए बाल अपराध के कानूनों का सहारा लेकर सख्त सजा से बचने नहीं दिया जाना चाहिए. इसलिए उनकी अदालत से गुजारिश है कि वह नाबालिग को व्यकस्कत घोषित करते हुए उसका मामला सत्र अदालत में भेज दे.
 
वहीं, दिल्ली पुलिस की इस अर्जी पर बचाव पक्ष ने अपनी आपत्ति जाहिर की. बचाव पक्ष ने कहा कि कानून सभी के लिए एक समान है. इस तरह से किसी नाबालिग को एडल्ट नहीं घोषित किया जा सकता.
 
क्या है मामला? 
दरअसल घटना 4 अप्रैल को उत्तरी दिल्ली के पॉश इलाके सिविल लाइन की है. इस घटना में 33 वर्षीय बिजनेस सलाहकार सिद्धार्थ शर्मा की मौत हो गई थी जो कि उस सड़क पार कर रहा था. पुलिस ने नाबालिग को घटना के एक दिन बाद पांच अप्रैल को हिरासत में लिया था. परंतु उसे लापरवाही से मौत के मामले में जमानत दे दी गई.
 
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बाद में इस मामले में पुलिस ने यूटर्न लेते हुए लापरवाही से मौत का मामला दर्ज कर लिया. जिसके बाद नाबालिग ने फिर से पुलिस के समक्ष समर्पण किया  और उसे बाल होम भेज दिया गया था. इस मामले में आरोपी घटना के चार दिन बाद ही 18 साल का हो चुका है. नाबालिग को बाल न्यामयालय से 26 अप्रैल को जमानत भी मिल चुकी है.

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