नई दिल्ली. ताजमहल की खूबसूरती को बचाने के लिए एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) एक बार फिर से आगे आया है. एनजीटी ने ताजमहल के पास यमुना नदीं में लगातार बढ़ रहे कूड़े-कचरे की डंपिंग को लेकर चिंता जाहिर की है. एनजीटी ने सम्बंधित विभागों को फटकार लगाते हुए कहा कि आप एक विश्व धरोहर को भी साफ़ नहीं रख सकते हैं तो और क्या करेंगे. 
 
एनजीटी ने कहा कि हम पिछ्ले एक साल से आदेश दे रहे है, लेकिन आपने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है. साथ ही एनजीटी ने सम्बंधित विभागों को सख्त हिदायत दी है कि ताजमहल के पास यमुना में लगातार कूड़े-कचरे को जल्द से जल्द साफ किया जाये. साथ ही कोर्ट ने अगली सुनवाई मेंर सम्बंधित विभाग के शीर्ष अधिकारियों को कोर्ट में मौजूद रहने का आदेश दिया हैं.  
 
बता दें कि एनजीटी ने ताजमहल पर धब्बा लगाने वाले हरे कीड़ों ( किरोनॉमस कैलीग्राफस) को लेकर केंद्र और यूपी के संबंधित प्राधिकरणों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा था. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि वैश्विक धरोहर ताजमहल के नजदीक से गुजरने वाली यमुना में लगातार कूड़े-कचरे की ठोस डंपिंग हो रही है. जिसके कारण बड़े पैमाने पर विशेष प्रजाति के कीड़े पैदा हो रहे हैं. ये कीड़े न सिर्फ ताजमहल के सफेद संगमरमर को नुकसान पहुंचा रहे हैं. बल्कि इन कीड़ों के चलते ताज पर हरे और काले रंग के धब्बे भी उभर रहे हैं. यह यमुना के प्रदूषित जलस्तर को भी दर्शाता है. 
 
इन कीड़ों के कारण ताज को पहुंचने वाले नुकसान को लेकर संत जॉन स्कूल आगरा की ओर से एक प्रारंभिक रिपोर्ट भी जारी की गई थी. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि इन हरे रंग के कीड़ों के चलते वैश्विक धरोहर को नुकसान पहुंच रहा है. वहीं, याचिका में एनजीटी से मांग की गई है कि इस मामले की जांच के लिए एक कमेटी नियुक्त की जाये.
 
 
 
 

देश और दुनिया की ताजातरीन खबरों के लिए हमे फॉलो करें फेसबुक,गूगल प्लस, ट्विटर पर और डाउनलोड करें Inkhabar Android Hindi News App