नई दिल्ली. केंद्रीय मंत्रीमंडल ने मेडिकल परीक्षाओं को लेकर कॉमन मेडिकल टेस्ट (एनईईटी) पर एक साल तक के लिए रोक लगा दी है. शुक्रवार को कैबिनेट ने राज्य बोर्डों को एनईईटी के दायरे से एक साल के लिए बाहर रखने संबंधी अध्यादेश को पास कर दिया है. 
 
इस अध्यादेश के पास होने के बाद राज्य के बोर्ड एक साल तक अपने स्तर पर मेडिकल परीक्षाएं करवा सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने के लिए एक एंट्रेंस एग्जाम यानी एनईईटी करवाने का फैसला दिया था. कई राज्यों ने इसका विरोध किया था, जिसके बाद कैबिनेट ने इस फैसले पर एक साल तक रोक लगाने के लिए अध्यादेश को मंजूरी दे दी,.
 
एनईईटी पर अध्यादेश को कैबिनेट ने पास कर दिया है और स्वीकृति के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा है. बता दें कि सरकार का यह अध्यादेश केवल राज्य द्वारा संचालित कॉलेजों पर लागू होगा, प्राइवेट कॉलेजों पर नहीं. 
 
केजरीवाल ने किया अध्यादेश का विरोध
 
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सरकार के इस अध्यादेश को रोकने की अपील करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखा है.
 
 
केजरीवाल ने खत में कहा है कि कई सांसद और कई पार्टियों के नेता अपना प्राइवेट मेडिकल कॉलेज चला रहे हैं. ये सब नहीं चाहते कि ऐडमिशन में हो रही धांधली रुके. उन्होंने कहा कि अगर सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अध्यादेश लाती है तो देश में संदेश जाएगा कि वह काला धन संचय करने वालों का साथ दे रही है.
 
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश था कि 2016-17 से एमबीबीएस, बीडीएस के लिए NEET परीक्षा का आयोजन किया जाए. 1 मई को NEET परीक्षा का पहला चरण हुआ और 24 जुलाई को NEET परीक्षा का दूसरा चरण होगा. 17 अगस्त को NEET परीक्षा के नतीजे आएंगे और 30 सितंबर तक दाखिले की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. राज्य सरकारों ने अलग प्रवेश परीक्षा की मांग के लिए अपील की थी जिसे खारिज कर दिया गया था.

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