उज्जैन. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्जैन में आयोजित सिंहस्थ कुंभ में कहा है कि कुंभ विशाल भारत को समेटने का माध्यम है. मोदी ने तीन-दिवसीय अंतरर्राष्ट्रीय विचार महाकुंभ में घोषणापत्र जारी करते हुए यह बात कही. उन्होंने कहा, ‘हम सभी लोग आत्मा के अमरत्व से जुड़े हैं. कुंभ मेला पुरातन परंपराओं में से एक है और विशाल भारत को अपने आप में समेटने का प्रयास कुंभ से ही शुरू हुआ है’.
 
प्रधानमंत्री ने 51 अमृत बिंदु पर चर्चा करते हुए कहा कि समाज के लिए निस्वार्थ भाव से काम करने वाले लोगों की शुभ शक्तियों को एक दिशा में लगाना होगा. उन्होंने कहा, ‘भारत को मानवता और दुनिया को दिशा देने के लिए मजबूत करना होगा. वेद के प्रकाश में उपनिषदों की रचना, उपनिषदों के प्रकाश में श्रुति-स्मृतियों के माध्यम से मानवता को दिशा मिलेगी’.
 
मोदी ने विश्व की समस्याओं पर बात करते हुए कहा कि दुनिया की दो सबसे बड़ी समस्या है- ग्लोबल वार्मिंग और आतंकवाद. उन्होंने कहा, ‘कुंभ हमें कंफ्लिक्ट मैनेजमेंट सिखाता है. हमारी परंपरा हमें सशक्त बनाती है. समय के अभाव में परंपराओं में बदलाव आया है लेकिन हमें अपनी जड़ों और मूल्यों के महत्व को समझना होगा. हम उन सिद्धांतों में पले-बढ़े हैं, जहां शरीर आता-जाता है, लेकिन हम आत्मा को काल का गुलाम नहीं बनने देते’.
 
बता दें कि इस दौरान महांकुभ में श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेना भी मौजूद थे. मोदी ने  इंदौर में सिरीसेना का औपचारिक स्वागत किया.

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