नई दिल्ली. केंद्रीय रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने शुक्रवार को लोकसभा में अगस्ता वेस्टलैंड डील पर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है. पर्रिकर ने कहा कि टेंडर के नियमों में बदलाव करते हुए हेलीकॉप्टरों की कीमत 6 गुना अधिक कर दी गई थी. उन्होंने कहा कि यूपीए ने 793 करोड़ पर डील तय की थी लेकिन बाद में 4877.5 करोड़ में डील हुई. उन्होंने सवाल किया की बेंचमार्किंग कॉस्ट इतना क्यों बढ़ा दिया गया? पर्रिकर ने कहा है कि अगस्ता के साथ डील के लिए कांग्रेस ने हर संभव कदम उठाया था.
 
पर्रिकर ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया में दो कंपनिया आखिरी चरण तक पहुंची थी लेकिन सिर्फ अगस्ता वेस्टलैंड को ही रियायत दी गई, एस-92 को क्यों नहीं? उन्होंने कहा कि साल 1999 में डील की प्रक्रिया शुरु हुई थी और कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों में बदलाव किए गए थे. 
 
पर्रिकर ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि अगस्ता मामले में सीबीआई ने मार्च 2013 में एफआईआर दर्ज की थी, लेकिन दिसंबर तक उसे प्रवर्तन निदेशालय को नहीं सौंपा गया, ऐसा क्यों? उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि अगस्ता वेस्टलैंड कंपनी कर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई थी.
 
उन्होंने कहा कि त्यागी और खेतान ने बहती गंगा में हाथ धोए थे और बहती गंगा कहां जा रही है यह राज्यसभा में उस दिन स्पष्ट हो गया है. पर्रिकर ने कहा कि त्तकालीन रक्षा मंत्री ने इटली के अखबारों में घोटाले की खबर आने के बाद कंपनी से बात करने की कोशिश नहीं की. बल्कि विदेश मंत्रालय के जरिए दूतावास से संपर्क करवाया.
 
क्या है मामला?
 
यूपीए-1 सरकार के वक्त 2010 में अगस्ता वेस्टलैंड से वीवीआईपी के लिए 12 हेलिकॉप्टरों की खरीद की डील हुई थी. डील के तहत मिले 3 हेलिकॉप्टर आज भी दिल्ली के पालम एयरबेस पर खड़े हैं. इन्हें इस्तेमाल में नहीं लाया गया. डील 3,600 करोड़ रुपए की थी. टोटल डील का 10% हिस्सा रिश्वत में देने की बात सामने आई थी. इसके बाद यूपीए सरकार ने फरवरी 2010 में डील रद्द कर दी थी. तब एयरफोर्स चीफ रहे एसपी त्यागी समेत 13 लोगों पर केस दर्ज किया गया था.
 
जिस मीटिंग में हेलिकॉप्टर की कीमत तय की गई थी, उसमें यूपीए सरकार के कुछ मंत्री भी मौजूद थे. इस वजह से कांग्रेस पर भी सवाल उठे थे.

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