नई दिल्ली: केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को फिर दोहराया कि आभूषण कारोबारियों को सोने पर एक फीसदी उत्पाद शुल्क देना ही होगा. बजट में सोने पर 1 फीसदी उत्पाद शुल्क लगाई गई थी. उन्होंने कहा कि बैंकों के एनपीए चिंता का एक मुद्दा हैं. एनपीए को छुपाने से समस्या का समाधान नहीं होगा. वे बैलेंस शीट में नजर आनी चाहिए और पूंजीकरण के जरिए उनका समाधान होना चाहिए.

 
इससे पहले जेटली ने राज्यसभा में कहा था कि एक फीसदी उत्पाद शुल्क सिर्फ उन्हीं आभूषण कारोबारियों पर लागू होगा, जिसका कारोबार कम से कम 12 करोड़ रुपये का है. यह छोटे कारोबारियों पर लागू नहीं होगा. 
 
जेटली ने कहा, “यदि हमें वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की तरफ बढ़ना है, तो पहला कदम है विलासिता के सामानों पर कर लगाना. कोई भी राजनीतिक पार्टी विलासिता की वस्तुओं को कर दायरे से बाहर रखने और 18 फीसदी कराधान की मांग एक साथ नहीं कर सकती है, क्योंकि ऐसा नहीं हो सकता है.” 
 
जेटली ने यह भी कहा कि सोने के आभूषण निर्माताओं के लिए पंजीकरण की समय सीमा 31 मार्च 2015 से बढ़ाकर 30 जून 2016 कर दी गई है. उन्होंने कहा, “हमने पंजीकरण की समय सीमा दो महीने के लिए बढ़ा दी है. तब तक लाहिड़ी समिति की रिपोर्ट भी आ जाएगी.” सरकार ने आभूषण पर उत्पाद शुल्क का विश्लेषण करने के लिए अशोक लाहिड़ी उप-समिति का गठन किया है.  
 
जेटली ने कहा कि इस वक्त सोने पर सीमा शुल्क 10 फीसदी है. इसे और नहीं बढ़ाया जा सकता, क्योंकि इससे तस्करी बढ़ेगी. उन्होंने कहा, “सीमा शुल्क बढ़ाया नहीं जा सकता. सोने पर सेवा कर लागू नहीं है. इसलिए विकल्प के रूप में सिर्फ उत्पाद शुल्क है.” कांग्रेस पार्टी पर जीएसटी विधेयक को संसद में पारित करने में बाधा पहुंचाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, “जैसे ही कांग्रेस समर्थन करेगी और जीएसटी लागू होगा, वैसे ही वैट और उत्पाद शुल्क को मिलाकर एक कर दिया जाएगा.”

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