नई दिल्ली. भारत सरकार पठानकोट एयरबेस जैसे हमले और समय-समय पर पाकिस्तान से घुसपैठ कर रहे आतंकियों से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार ने पाकिस्तान के साथ लगी 2900 किलोमीटर लंबी पश्चिमी सीमा की सुरक्षा को और मजबूत करने की योजना को मंजूरी दे दी है.
 
इस योजना के तहत बॉर्डर की फाइव-लेयर सुरक्षा की जाएगी. सरकार ने ‘कॉम्प्रिहेंसिव बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम’ (CIBMS) तकनीक के जरिए 365 दिन बॉर्डर की निगरानी के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. सीआईबीएमएस अधिकारी ने कहा कि पठानकोट जैसे हमलों, घुसपैठ, तस्करी की घटना को रोकने का यही एकमात्र रास्ता है. 
 
सीमा पर 5 लेवल पर सिक्युरिटी
इस योजना के अमल होने पर इंटरनेशनल बॉर्डर को पूरी तरह लॉक कर पांच स्तरीय सुरक्षा की जाएगी. चौबीसों घंटे नई तकनीक से सीमा की निगरानी की जाएगी. इसके जरिए चौबीसों घंटे बेहद आधुनिक और उन्नत तकनीक के जरिए सीमा की निगरानी शामिल है. बता दें कि आजादी के बाद यह पहला मौका होगा जब सरकार पश्चिमी सीमा को पूरी तरह से लॉक करने जा रही है. 
 
कई उपकरणों से की जाएगी सिक्युरिटी
एक अफसर के मुताबिक पुख्ता सिक्युरिटी के लिए बॉर्डर पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे. थर्मल इमेज और नाइट विजन डिवाइस की मदद ली जाएगी. बॉर्डर पर सर्विलांस (निगरानी) राडार भी लगेंगे. जिससे हर एक्टिविटी पर निगाह रखी जा सके. इसके अलावा लेजर बैरियर्स लगेंगे ताकि पाक की तरफ से आने वाले आतंकी का पता चल सके साथ ही जमीन के अंदर मॉनिटरिंग सेंसर्स बिछाए जाएंगे. उन्होंने यह भी बताया कि हर एक किलोमीटर पर ये सिस्टम लगाने में एक करोड़ रुपए का खर्च आएगा.
 
लेजर बैरियर से कवर होंगे 130 सेक्शन
लेजर बैरियर से बिना फेन्सिंग वाले 130 सेक्शन को कवर किया जाएगा. इससे जम्मू-कश्मीर से गुजरात तक नदी, पहाड़ों और उनकी जमीनी इलाकों तक सिक्युरिटी की जाएगी. बता दें कि आतंकी ज्यादातर नदी और पहाड़ के रास्ते ही भारतीय सीमा में दाखिल होते हैं.

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