नई दिल्ली. IIT की फीस 90 हजार से बढ़ाकर 2 लाख किए जाने से स्‍टूडेंट्स को बड़ा झटका लगा है, यह नए सेशन से लागू होगी. बता दें कि आईआईटी काउंसिल ने हाल ही में सुझाव दिया था कि IIT के अंडरग्रेजुएट कोर्स की फीस 90,000 हजार सालाना से बढ़ाकर 3 लाख कर दी जाए. आईआईटी में इससे पहले 2013 में फीस बढ़ाई गई थी, तब सालाना फीस 50,000 रुपए से बढ़ाकर 90,000 रुपए की गई थी.
 
SC, ST लिए मुफ्त: ईरानी
केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्‍मृति ईरानी ने कहा कि केंद्र सरकार एससी, एसटी के साथ-साथ दिव्‍यांग स्‍टूडेंट्स के लिए आईआईटी में मुफ्त शिक्षा दिए जाने की योजना बना रही है. इसके संबंध में औपचारिक घोषणा जल्‍द की जाएगी. उन्‍होंने यह भी कहा कि इन स्‍टूडेंट्स की फीस पूरी तरह से खत्‍म किए जाने के अलावा पांच लाख रुपये से कम आमदनी वाले परिवारों के बच्‍चों की फीस में 66 फीसदी की छूट भी दी जाएगी.
 
पहले से लागू है आरक्षण
इस बीच अनुसूचित जाति(SC), अनुसूचित जनजाति (ST) के साथ-साथ दिव्यांग स्‍टूडेंट्स और बीपीएल परिवार के स्‍टूडेंट्स को राहत दी गई है. सूत्रों के मुताबिक, एससी, एसटी, दिव्यांग और एक लाख कम आमदनी वाले परिवार वाले छात्रों की फीस माफ होगी और 5 लाख तक जिन परिवारों की आय होगी उनके बच्चों की फीस 2 तिहाई माफ की जाएगी. आपको बता दें कि आईआईटी में एससी के लिए 15 फीसदी, एसटी के लिए 7.5 फीसदी और ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण लागू है. फीस में 66 फीसदी की छूट किए जाने से स्‍टूडेंट्स को लाभ मिलेगा.
 
कैसे होता है IIT में एडमिशन?
पहला आईआईटी खड़गपुर में 1951 में खुला था. तब 12th के मार्क्स के बेसिस पर इंटरव्यू होते थे और देश में कहीं भी एडमिशन मिलता था. 1955-59 के बीच आईआईटी खड़गपुर ने एग्जाम लेना शुरू किया. इंटरव्यू और काउंसलिंग के बाद किसी ब्रांच में एडमिशन दिया जाता था. कॉमन IIT-JEE एग्जाम 1960 से शुरू हुआ. इसमें इंग्लिश लैंग्वेज मिलाकर चार सब्जेक्ट के पेपर होते थे. 1997 में IIT-JEE एग्जाम साल में दो बार होने लगा. इसकी वजह कुछ सेंटरों में पेपर लीक होना बताया गया था. 2006 से एक ऑब्जेक्टिव टाइप का प्रिलिमनरी एग्जाम कर दिया गया. इसमें पास होने वाले कैंडिडेट्स को मेन्स देना होता है. एग्जाम में बैठने वाले जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स को 12वीं में 60 पर्सेंट और रिजर्व कैटेगरी के स्टूडेंट्स को 55 पर्सेंट मार्क्स लाने होते हैं.

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