नई दिल्ली. आठ साल पहले नामचीन हस्तियों से अंतरंग बातचीत के टेप उजागर होने से चर्चा में रहीं वैष्णवी कम्युनिकेशन की संस्थापक नीरा राडिया एक बार फिर सुर्खियों में हैं. इस बार पनामा पेपर्स ने उनकी विदेश में कंपनी होने का खुलासा किया है. नीरा पहले मंत्रियों, पत्रकारों और बड़े उद्योगपतियों से बातचीत के टेप सार्वजनिक होने से मीडिया में सुर्खियां बटोर चुकी हैं.
 
इंडियन एक्सप्रेस ने बुधवार को प्रकाशित खबर में कहा है कि जिन दस्तावेजों की जांच की गई है, उनमें नाम नीरा राडिया है. सिर्फ एक अतिरिक्त आई लिखा हुआ है. दस्तावेजों का कथित रूप से संबंध ब्रिटिश वर्जिन द्वीपों से जुड़ी एक कंपनी से है. इस आरोप से नीरा के कार्यालय ने इनकार किया है.
 
भारतीयों पर खुलासे के तीसरे हिस्से के रूप में लिखे लेख में नीरा राडिया के विदेशी कंपनी से संबंध के बारे में कहा गया है कि कर वंचकों के लिए पनाहगाह देश में सूचीबद्ध कंपनी क्राउनमार्ट इंटरनेशनल ग्रुप के 232 दस्तावेजों में प्रमुखता के साथ निदेशक के रूप में नीरा राडिया का नाम है. अखबार में बुधवार को जो सूची प्रकाशित हुई है, उसमें कर्नाटक स्थित बेल्लारी के एक शीर्ष व्यवसायी, एक प्रमुख उद्योगपति और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट का भी नाम है. इंडियन एक्सप्रेस का कहना है कि विदेश में कंपनी चलाने पर प्रतिक्रिया के लिए अखबार ने उनसे संपर्क किया. उनमें से कई ने अपनी बात भी रखी.
 
एक अन्य लेख में यह भी कहा गया है कि किस तरह से करेंसी नोट बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी डी ला रुई ने दिल्ली के एक व्यवसायी को भारत में बैग का व्यापार करने वालों की मदद करने का करार किया था. बदले में 15 फीसद कमीशन देने की बात तय हुई थी. अखबार ने कंपनी की पहचान अफरा कंसल्टेंट के रूप में की है और उसका संबंध नई दिल्ली के सोमेंद्र खोसला से है. 
 
इन आरोपों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि किसी भारतीय द्वारा विदेश में खोली गई हर कंपनी गैरकानूनी हो, जरूरी नहीं है. रिजर्व बैंक की जांच का पहला काम इसकी जांच करना है. राडिया के बारे में अखबार ने लिखा है, इन पत्रों की जांच से पता चलता है कि विदेश में एक कंपनी की मालकिन राडिया हैं. मोसैक फोंसेका ने 1994 में ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में इस कंपनी का पंजीकरण कराया है. इसका नाम क्राउनमार्ट इंटरनेशनल ग्रुप लिमिटेड है. यह एक इंटरनेशनल बिजनेस कंपनी है.
 
इसके जवाब में राडिया के कार्यालय ने कहा है कि उस कंपनी की स्थापना उनके पिता इकबाल नारायण मेनन ने की थी और उस कंपनी से नीरा लाभान्वित नहीं हुई हैं. यह भी कहा गया है कि नीरा राडिया ने ब्रिटेन और भारत के अधिकारियों को अपनी संपत्ति का जो खुलासा किया है वह जानकारी किसी तीसरे पक्ष के लिए व्यक्तिगत एवं गोपनीय है. 
 
बुधवार को एक और लेख प्रकाशित हुआ है, जिसमें भारतीय हीरा व्यापारियों की बात कही गई है और लिंचेस्टाइन, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में खाते रखने के मामले जिनकी पहले जांच की गई थी, उनका नाम भी पनामा पेपर्स में सामने आया है. इनमें दुनिया के सर्वाधिक बड़े हीरा व्यापारियों में एक रोजी ब्लू और बेल्जियम स्थित जेमबेल परिवार के चेतन मेहता प्रमुख हैं.
 
अखबार ने लिखा है कि रोजी ब्लू के हर्षद रमणिकलाल मेहता ने इस बारे में पूछने पर कोई जवाब नहीं दिया. चेतन मेहता ने कहा कि वह प्रवासी भारतीय हैं और बेल्जियम में रहते हैं और वे कंपनियां बहुत पहले ही बंद हो गई हैं. हैदराबाद के मोतुरी श्रीनिवास प्रसाद ने कहा कि इस सूची में शामिल विदेशी कंपनियां व्यवसाय की उम्मीद में खोली गई थीं, लेकिन बंद हो गईं.