नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी की 2019 लोकसभा चुनाव से पहले मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. चुनाव नजदीक आता जा रहा है और एनडीए गठबंधन कमजोर हो रहा है. अब तक एनडीए के 16 सहयोगी दल एक-एक करके अलग हो चुके हैं. जबकि 5 दलों ने बीजेपी पर दबाव बनाया हुआ है. वह भी एनडीए छोड़ने की धमकी दे चुके हैं. भाजपा ने 2014 का लोकसभा चुनाव 28 दलों के साथ मिलकर लड़ा था. इस चुनाव में बीजेपी को 282 और 22 दलों को 54 सीट मिली थीं. इसके बाद अन्य कई और दल एनडीए में शामिल हुए और घटक दलों की तादाद 42 तक पहुंच गई. लेकिन विभिन्न मुद्दों को लेकर अब घटक दल बीजेपी से अलग हो रहे हैं. हाल ही में नागरिक (संशोधन) बिल के विरोध के बाद असम गण परिषद (एजीपी) ने एनडीए को अलविदा कह दिया.

साल 2018 एनडीए के लिए किसी सदमे से कम नहीं था. बड़े क्षेत्रीय दलों ने इसी अवधि में गठबंधन का दामन छोड़ा. बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तान आवाम मोर्च ने 2018 की शुरुआत में ही एनडीए को टाटा बाय-बाय कर विपक्ष के महागठबंधन में शामिल हो गए. एनडीए के पुराने घटक दल नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) ने भी फरवरी 2018 में 15 साल पुराना रिश्ता खत्म कर दिया. मार्च में आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू की तेलुगूदेशम पार्टी (टीडीपी) भी एनडीए छोड़कर चलती बनी. वे बीजेपी के आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिए जाने के कारण गुस्सा थे. बंगाल में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा, कर्नाटक चुनाव के बाद कर्नाटक प्रज्ञावंत जनता पार्टी और हाल ही में मोदी सरकार में मंत्री रहे उपेंद्र कुशवाहा ने भी एनडीए को अलविदा कह दिया था. जम्मू-कश्मीर में भाजपा ने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के साथ गठबंधन कर सरकार बनाई थी,लेकिन पिछले साल महबूबा मुफ्ती ने भी साथ छोड़ दिया.

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