नई दिल्ली. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने एक ऐसा रडार विकसित किया है जिससे दीवार के आर-पार भी देखा जा सकता है. इस रडार का नाम दिव्यचक्षु रखा गया है. यह भारतीय सुरक्षा बलों के किसी भी बंधक की स्थिति में चतुरता से निपटने की दशा में मदद की बड़ी कामयाबी मानी जा रही हैं. बता दें कि इसे डीआरडीओ के बेंगलुरु में मौजूद रडार विकास अधिष्ठान (एलडीआरई) में विकसित किया गया है. जहां इसका अभी परीक्षण जारी है.
 
20 से 30 सेमी मोटी दीवार के पार देखने की क्षमता
इस परियोजना से जुड़े एक वैज्ञानिक ने इसकी खुबियों के बारे में बताते हुए कहा कि यह रडार 20 से 30 सेंटीमीटर मोटाई वाली किसी भी चीज की बनी दीवार के पार देखा जा सकता है. उन्होंने ने बताया कि यह थर्मल सिग्नेचर को पकड़ता है, जिससे कमरे में हो रही गतिविधियों को स्पष्ट रूप से दिखा सकता है.
 
बंधक स्थितियों में काफी मददगार
वैज्ञानिक ने आगे यह भी कहा कि बंधक स्थितियों के दौरान इस रडार की सहायता यह पता लगाया जा सकता है कि कमरे में कितने लोग हैं. इसके अलावा कमरे में उपस्थित लोगों गतिविधियों को देखकर आसानी से पता लगाया जा सकता है कि बंधक कौन है और आतंकवादी कौन है.
 
2010 में हुई परियोजना की शुरुआत
इस रडार के बारे में मुंबई में नवंबर 2008 में हुए हमले के बाद सोचा गया था.  इस परियोजना की शुरुआत नवंबर 2010 में हुई. उम्मीद जताई जा रही है कि इसका परीक्षण इस साल के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा. बता दें कि अभी तक भारतीय सेना के पास कोई ऐसा यंत्र नहीं है.
 
35 लाख रुपये की लागत
इस उपकरण को काफी कम लागत में देश में ही विकसित किया गया है. इसकी कीमत 35 लाख रुपये के आसपास है. जबकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ऐसे उपकरणों की कीमत 2 करोड़ रुपये के आसपास होती है. इतना ही नहीं इस उपकरण को हल्का बनाने की कोशिश भी जारी है. फिलहाल इसका वजन 6-7 किलोग्राम के आसपास है.

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