नई दिल्ली. बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर का कहना है कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चमचा कहा जाता है तो उन्हें उसकी कोई परवाह नहीं है. मोदी के चमचा कहे जाने पर उन्होंने कहा कि ‘दूसरे की बाल्टी की बजाए मुझे नरेंद्र मोदी का चमचा कहा जाना ठीक लगता है. मैं रक्षात्मक हो जाऊं इसलिए ये शब्द (चमचा) इस्तेमाल किया जाता है. मैं दिलीप कुमार और अमिताभ बच्चन का भी चमचा हूं.’’
 
नारे लगाने से दिक्कत पर उठाया सवाल
पीएम मोदी के पक्ष में नारे लगाने का विरोध करने पर अनुपम ने तीखा विरोध जताते कहा कि हमारे बच्चे स्कूलों में अपने प्रधानमंत्री की तारीफ में नारे क्यों नहीं लगा सकते? बच्चे थे तो हम अपने स्कूलों में लाल बहादुर शास्त्री के लिए नारे लगाते थे. क्या दिक्कत है? उन्होंने कहा कि मोदी लगातार देश की बात करते हैं और उनसे पहले किसी भी प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से महिलाओं के लिए शौचालय की बात नहीं कही.
 
‘राजनीति से ज्यादा आजादी है महत्वपूर्ण’
भविष्य में राजनीति में शामिल होने से इंकार करते हुए अनुपम ने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल से जुड़ने की बजाए अपनी आजादी को महत्व देते हैं.
 
भाषण हुआ वायरल
देश में देशद्रोह के गर्माते मुद्दे के बीच अनुपम खेर का हाल ही में दिया एक बयान पूरे सोशल मीडिया पर तेजी से ट्रेंड कर गया. एक कार्यक्रम में जस्टिस अशोक गांगुली, प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला और मशहूर सोशलाइट सुहेठ सेठ थे.
 
इस बीच जब जस्टिस गांगुली ने अफजल गुरु की फांसी को लेकर कहा, “फांसी दिए जाने के तरीके पर मैं (पूर्व) न्यायाधीश के तौर पर बोल रहा हूं. उसकी दया याचिका तीन फरवरी को खारिज कर दी गई और फांसी नौ फरवरी को हुई. उन्होंने कहा कि यह गलत है. उसके पास इसे चुनौती देने का अधिकार था. परिवार का अधिकार था कि उन्हें इस बारे में सूचना दी जाती.” 
 
तब अनुपम ने बयान का जवाब देते हुए कहा कि मैं आपके बयान से हैरान हूं. यह शर्मसार और दुखी करने वाला है. आप सुप्रीम कोर्ट के फैसले को गलत ठहरा रहे हैं. यह बहुत दुख की बात है. यह कलंकित करने वाला है.

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