नई दिल्ली. भारतीय वायु सेना की तरफ से आए एक बयान पर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है. वाइस चीफ एयर मार्शल बी एस धनोआ ने कहा है कि भारतीय वायु सेना को दुश्मनों से लड़ने के लिए और ज्यादा ताकत की जरूरत है. सेना एक साथ दो दुश्मनों का सामना करने के काबिल नहीं है.
 
उन्होंने कहा है कि अगर कभी ऐसी नौबत आ जाए की हिन्दुस्तान को अपने दो पड़ोसियों पाकिस्तान और चीन से एकसाथ युद्ध करना पड़े तो ऐसे हालात के लिए सिर्फ 33 स्कवाड्रन है. जबकि होने चाहिए 42 स्कवॉर्डन. मतलब 9 स्कवाड्रन की कमी है.
 
स्कवॉर्डन होता क्या है ?
एयरफोर्स में जंगी जहाजों का पूरे बेड़े को स्कवॉर्डन कहा जाता है. स्कवॉर्डन में ही जीत की रणनीति बनाई जाती है. दुश्मनों को मारने जाने वाले फाइटर जेट्स की उड़ान तय होती है. टीम लीडर का चयन होता है. इसलिए जरूरत के हिसाब से स्कवॉर्डन होते हैं.
 
दुनिया की चौथी सबसे ताकतवर एयरफोर्स 
भारत की वायु सेना दुनिया की चौथी सबसे ताकतवर एयरफोर्स मानी जाती है. अगर संख्या बल के हिसाब से देखें तो हिन्दुस्तान के पास 1 लाख 27 हजार वायुसैनिक हैं. पाकिस्तान के पास 65 हजार और चीन के पास तीन लाख 98 हजार वायु सैनिक हैं. लेकिन युद्ध में वायु सेना का असली ताकत फाइटर जेट्स है. भारत के पास 1380 फाइटर जेट्स है. पाकिस्तान के पास सिर्फ 530 लेकिन चीन के पास 2942. जिस स्कवॉर्डन की बात वाइस एयर चीफ मार्शल के जरिए सामने आई है. उसकी संख्या भारत में 33, पाकिस्तान में 15 से 17 जबकि चीन में 60 से 70 है. चीन-पाकिस्तान को एकसाथ करते हीं हर मोर्चे पर हमारी तैयारी कमजोर दिखती है.
 
बता दें कि वाइस एयर चीफ मार्शल का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब राजस्थान के पोकरण में आयरन फीस्ट-2016 की तैयारी हो रही है. इस फीस्ट में युद्धाभ्यास होना है. तैयारियों की समीक्षा होनी है.
 

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