नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली में यमुना किनारे श्री श्री रविशंकर के प्रोग्राम वर्ल्ड कल्चरल फेस्टिवेल को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हरी झंडी दे दी है. लेकिन मामले में एक नया खुलासा सामने आया है जिसमें सेना की मदद से यमुना पर पंटून पुल बनाया गया है.
 
मामला इसलिए गरमा गया है क्योंकि निजी काम में सेना का इस्तेमाल किया जाना गलत माना जा रहा है. सेना की मदद पर आज संसद में भी सवाल उठाया गया था.
 
जानकारी के अनुसार दिल्ली सरकार के अनुरोध पर ही सेना ने पुल बनाने में मदद की थी. दिल्ली सरकार के संस्कृत मंत्री कपिल मिश्रा ने रक्षा मंत्री को चिठ्ठी लिखी थी जिसके बाद सेना ने पुल बनाने में मदद की.
 
एनजीटी ने लगाया जुर्माना
भले ही एनजीटी ने रविशंकर के 11 से 13 मार्च तक होने वाले महोत्वस को मंजूदी दे दी हो लेकिन पूरे प्लान का खुलासा न करने पर एनजीटी ने रविशंकर के आर्ट ऑफ लिविंग पर एनजीटी ने बड़ा जुर्माना लगाया है.
 
अन्य सरकारी विभागों पर भी जुर्माना लगाया गया है. जानकारी के अनुसार जहां आर्ट ऑफ लिविंग को 5 करोड़ के जुर्माने का भुगतान करना होगा वहीं डीपीसीसी को एक लाख और डीडीए 5 लाख के जुर्माने का भुगतान करना होगा. एनजीटी ने यह भी आदेश दिया है कि आयोजन के बाद सफाई और नुकसान की भरपाई की जाएगी.
 
एनजीटी ने जताया था विरोध
श्री श्री रविशंकर के कार्यक्रम पर उठे विवाद को लेकर एनजीटी ने इस मामले में डीडीए को कड़ी फटकार लगाई थी. यमुना किनारे मलबा इकट्ठा होने को लेकर एनजीटी के सवाल पर डीडीए ने कहा कि उन्हें मलबे से जुड़ी जानकारी नहीं है. इसपर एनजीटी ने कहा कि डीडीए खुद को बचाने की कोशिश कर रही है. एनजीटी ने डीडीए से पूछा कि आपकी तरफ से तय की गई शर्तों पर क्या आयोजन हो रहा है.

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