श्रीनगर. पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने सोमवार को कहा कि उनके लिए गठबंधन के एजेंडे को लागू करना और जम्मू-कश्मीर में नई सरकार का नेतृत्व करना, दोनों ही महत्वपूर्ण हैं. लेकिन ऐसा हो, इसके लिए केंद्र सरकार को कदम उठाने होंगे. कुपवाड़ा शहर में पीडीपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए महबूबा ने कहा, “मेरे लिए बीजेपी के साथ गठबंधन मेरे दिवंगत पिता मुफ्ती मुहम्मद सईद की एक पवित्र विरासत है.” उन्होंने कहा, “लेकिन, मेरे लिए उतना ही पवित्र गठबंधन के उस एजेंडे को लागू करना भी है, जिस पर मेरे पिता बीजेपी के साथ सहमत हुए थे.” 
 
महबूबा ने कहा, “हमारा बीजेपी के साथ कोई मुद्दा नहीं है. मेरी पार्टी का बीजेपी के साथ गठबंधन बना हुआ है. मेरी मांग केंद्र सरकार से है कि वह आगे आए और जरूरी कदम उठाए, ताकि मेरा मुख्यमंत्री बनना राज्य की जनता के लिए लाभदायी हो.” 
 
पीडीपी अध्यक्ष ने फिर दोहराया कि दिखावे के लिए मुख्यमंत्री बनने की उनकी कोई तमन्ना नहीं है. उन्होंने कहा, “यदि मेरी ऐसी कोई उत्कट महत्वाकांक्षा होती तो मैं बहुत पहले राज्य की मुख्यमंत्री बन गई होती. यहां तक कि जब मेरे पिता जीवित थे, तब भी ऐसा हो सकता था.” 
उन्होंने कहा, “जब डॉक्टरों ने संक्रमण के डर से मेरे पिता को जनता से मिलने-जुलने से मना किया था तब मैं मुख्यमंत्री बन सकती थी. लेकिन, मैंने इसे पसंद नहीं किया क्योंकि मुफ्ती साहब की यह हार्दिक इच्छा थी कि वह अपने जीवन के अंतिम क्षणों तक अपने लोगों की सेवा करते रहें.”
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले साल दिसंबर में बगैर किसी तय कार्यक्रम के पाकिस्तान दौरे को याद करते हुए पीडीपी अध्यक्ष ने कहा, “मोदीजी के पाकिस्तान पहुंचने की खबर मैंने अपने पिता को तब दी जब वह अस्पताल में थे. वह मुस्कुराए और मुझसे बोले, मैंने हमेशा से तुमसे कहा है कि युद्ध न तो हमारे लिए समाधान है और न ही पाकिस्तान के लिए. मेरे लिए मेरे पिता के वे शब्द पवित्र हैं. हमारे जवान एक ऐसी उम्र में मर रहे हैं जिसमें उनसे जीवन में आगे बढ़ने की उम्मीद की जाती है.” 
 
महबूबा ने कहा, “एक गरीब का बेटा ऊधमपुर का रहने वाला कैप्टन तुषार हाल में एक मुठभेड़ में शहीद हो गया. वह मात्र 26 साल का था. एक दूसरा जिसे न्यूटन के नाम से जाना जाता था क्योंकि उसने 98 फीसद अंक पाए थे, वह आतंकी के रूप में 16 साल की उम्र में मारा गया.” उन्होंने कहा, “हमारे युवा चाहे 26 साल की उम्र में मारे जाएं या 16 की उम्र में, यह त्रासद है और इसे रोकने की जरूरत है. यदि मैं ऐसी विचारहीन हत्याओं को रोकने में सक्षम हुए बिना मुख्यमंत्री बनती हूं तो मेरे लिए उसका क्या मतलब है?”