नई दिल्ली. देश भर में इन दिनों देशप्रेम VS देशद्रोह पर बहस छिड़ी है. जेएनयू के औचित्य से लेकर स्मृति ईरानी के भाषण तक हर मामले पर चर्चा हो रही है. ऐसे समय में इंडिया न्यूज़ के मैनेजिंग एडिटर राणा यशवंत ने जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के गांव बीहट से जमीनी हक़ीकत बयां करने वाली रिपोर्टिंग की.
 
रिपोर्ट में कन्हैया के परिवार, गांव, दोस्त के मन में उठ रहे सवालों के साथ उन तथाकथित बुद्धिजीवियों के सवाल और उसके जवाब को समझने-समझाने की कोशिश की गई है. वामपंथी विचारधारा में पला बढ़ा एक लड़का देश विरोधी कैसे हो गया? जिस कन्हैया को लेकर देश, समाज, सिविल सोसाइटी दो धड़ों में बंट गई.
 
क्या कन्हैया ने देशद्रोह का गुनाह किया है ? क्या वाकई कन्हैया जिस परिवेश में पला-बढ़ा उससे इतर जेएनयू में सोचने लगा ?  हर सवाल का जवाब ढूंढती, खंगालती इस रिपोर्ट में कुल मिलाकर एक तस्वीर दिखाने की कोशिश की गई है.
 
सबके अपने-अपने तर्क हैं. फैसला कोर्ट को करना है. सवाल बड़ा है कि जेएनयू में 9 फरवरी को जो कुछ हुआ और उसके बाद देश भर में जो बवाल हुआ उसमें कहीं असल मुद्दा तो गुम नहीं हो गया. असल मुद्दा ये कि क्या आजादी की सीमा तय नहीं होनी चाहिए.
 
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