नई दिल्ली. वित्त मंत्री अरुण जेटली मोदी सरकार का सोमवार दूसरा आम बजट पेश करेंगे. जेटली सुबह 11 बजे बजट पेश करेंगे. इस बार के बजट से देश की जनता को बड़ी उम्मीदें है. वित्त मंत्री के सामने बजट में कृषि क्षेत्र और उद्योग जगत की जरूरतों के बीच संतुलन बिठाना बड़ी चुनौती होगी. विश्व अर्थव्यवस्था में सुस्ती के बीच, विकास के लिए सरकारी खर्च बढ़ाने, संसाधन जुटाने का भी लक्ष्य होगा. ऐसे में आम लोगों पर बोझ बढ़ सकता है. वेतनभोगी निराश हो सकते हैं. 
 
ग्रामीण रोजगार पर होगा खर्च!
पिछले दो बजट में जेटली ने खर्च का हिस्सा सब्सिडी से दूर बुनियादी ढांचे की ओर स्थानांतरित किया है. सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के क्रियान्वयन के अलावा उनके समक्ष बैंकों के पुन: पूंजीकरण भी चुनौती होगी. सूखे और फसल के निचले मूल्य से कृषि क्षेत्र प्रभावित है. ऐसे में सरकार ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना पर खर्च को जारी रखेगी, फसल बीमा का विस्तार करेगी और सिंचाई परिव्यय बढ़ाएगी.
 
पेट्रोल-डीजल पर सीमा शुल्क लागू कर सकते हैं
कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट और अगले एक साल में इनमें बढ़ोतरी की कम संभावना के मद्देनजर सरकार आयातित कच्चे तेल, पेट्रोल और डीजल पर सीमा शुल्क को फिर लागू कर सकती है. 2011 में इसे हटा दिया गया था. उस समय कच्चे तेल के दाम बढ़कर 100 डालर प्रति बैरल पर पहुंच गए थे. पिछले साल के दौरान सोने का आयात बढ़ा है ऐसे में सरकार सोने पर आयात शुल्क बढ़ा सकती है.
 
सर्विस टैक्स बढ़ेगा
सरकार सर्विस टैक्स 14.5 फीसदी से बढ़ाकर 16 फीसदी कर सकती है. हालांकि इसके साथ ही सर्विस टैक्स के लिए न्यूनतम सालाना कारोबार की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 25 लाख भी कर सकती है. मतलब कुल मिलाकर महंगाई पर खास असर नहीं पड़ेगा. छोटे कारोबारियों को फायदा होगा, क्योंकि उनका एक बड़ा तबका सर्विस टैक्स के दायरे से बाहर हो जाएगा.
 
सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर कम हो सकते हैं
हो सकता है कि सब्सिडी वाले गैस सिलेंडरों की संख्या कम कर दी जाए या एक तय आमदनी से ज्यादा के लोगों के लिए सस्ते सिलेंडर पूरी तरह खत्म कर दिए जाएं. सरकार का फोकस है कि सब्सिडी का फायदा उन्हीं लोगों को मिले, जिन्हें इसकी जरूरत है. इस नीति का असर आपके रसोई गैस के बिल पर दिख सकता है.
 
कर छूट को वापस ले सकते हैं
माना जा रहा है कि जेटली कॉरपोरेट कर की दरों को चार साल में 30 से 25 प्रतिशत करने के अपने पिछले साल के वादे को पूरा करने के लिए भी कुछ कदम उठाएंगे. समझा जाता है कि वह बजट में इस प्रक्रिया की शुरुआत करेंगे, जिसमें कर छूट को वापस लिया जाना शामिल होगा जिससे इस प्रक्रिया को राजस्व तटस्थ रखा जा सके. 

देश और दुनिया की ताजातरीन खबरों के लिए हमे फॉलो करें फेसबुक,गूगल प्लस, ट्विटर पर और डाउनलोड करें Inkhabar Android Hindi News App