नई दिल्ली. चाइल्डो पॉर्नोग्राफी पर अंकुश लगाने के मामले पर सुनवाई करते हुए सूप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने केंद्र सरकार को लेकर इस पर जल्द हलफनामा दायर करने के लिए कहा है. साथ ही कोर्ट ने सभी पक्षों से सरकार को इस सिलसिले में सुझाव देने की बात भी कही है. मामले में अगली सुनवाई 20 मार्च को होगी. 
 
केंद्र ने इसके जवाब में सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि बाल अश्लीलता को बंद करने के लिए काम शुरू हो गया है और अगली बार स्कीम के साथ आएंगे. जिसमें चाइल्ड पोर्नोग्राफी वाली वेबसाइट्स को ब्लॉक किए जाने वाली स्कीम की जानकारी दी जाएगी.
 
‘बच्चों को चाइल्ड पोर्नोग्राफी से बचाना जरूरी’
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस मुद्दे पर सख्त आदेश देते हुए कहा कि बच्चों को चाइल्ड पोर्नोग्राफी के दर्द से बचाना बेहद जरूरी है. इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि देश इस मुद्दे पर ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच’ जैसा कोई एक्सपेरिमेंट नहीं कर सकता. इसके अलावा बच्चे अब और दर्दनाक स्तिथी के शिकार नहीं हो सकते.
 
सरकार उठाए सख्त कदम 
इसके अलावा कोर्ट ने यह भी कहा कि सार्वजनिक जगहों पर पॉर्न देखने और दूसरों को देखने पर मजबूर करने पर सरकार सख्त कदम उठाए. सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर बच्चों के साथ प्रयोग की इजाज़त नहीं दी जा सकती. 
 
क्या है मामला?
बता दें कि कोर्ट ने 2014 में कहा था कि पोर्न वेबसाइटें खासकर चाइल्ड पोर्न से जुड़ी वेबसाइटें भारत में बच्चों को पोर्नोग्राफी की तरफ ढकेल रही हैं. इन पर कंट्रोल की जरूरत है. इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को पोर्न वेबसाइट्स और खासतौर से चाइल्ड पोर्नोग्राफी वेबसाइट्स को ब्लॉक करने के लिए तेजी से काम करने को भी कहा था. वहीं सरकार की ओर से कहा गया था कि ऐसी वेबसाइटों के सर्वर विदेशों में होने की वजह से इन्हें कंट्रोल नहीं किया जा सकता. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि अगर विदेशों में ऐसी साइटों पर रोक लग सकती है, तो भारत में क्यों नहीं?
 
पोर्न कंटेंट वाली लिस्ट सौंप चुकी है केंद्र सरकार
इसके अलावा पिछले साल अगस्त में भारत सरकार ने इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स को पोर्न कंटेंट वाली 857 वेबसाइट की लिस्ट सौंपी थी. सरकार ने इन पर रोक लगाने को कहा था. सरकार के इस फैसले के खिलाफ काफी हंगामा हुआ था. बाद में सरकार ने फैसला वापस ले लिया था.

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