अहमदाबाद. पटेल आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल ने जेल में ही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दिया है. हार्दिक इस वक्त राजद्रोह के आरोप में सूरत के लाजपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं. हार्दिक ने ओबीसी श्रेणी के तहत सरकारी नौकरियों और शिक्षा के क्षेत्र में अपने समुदाय के लिए आरक्षण की मांग के अलावा जेल में बंद अपने साथियों की रिहाई की मांग को भी अपने अनशन के एजेंडे के साथ जोड़ दिया है.
 
इस बात की पुष्टि करते हुए लाजपोरे जेल के जेलर एस एल दौसा ने कहा कि हार्दिक ने गुरुवार सुबह से भोजन करना बंद कर दिया है.
 
‘जेल में भूख हड़ताल करना है गैरकानूनी’
जेल प्रशासन ने बताया कि “हमने हार्दिक का मेडिकल टेस्ट कराया है, उन्हें जेल में सबसे अलग वार्ड में भेज दिया गया है. इसके अलावा जेल प्रशासन ने पाटीदार नेता को सूचित किया है कि जेल में भूख हड़ताल करना गैरकानूनी है. लेकिन हार्दिक ने प्रशासन की बात मानने से इनकार कर दिया. लेकिन इस पर प्रशासन का कहना है कि बह कानून के अनुसार कार्रवाई करेंगे.
 
20 फरवरी से अनशन करने के दिए थे संकेत
हार्दिक ने जेल अधीक्षक को लिखे पत्र में कहा था कि वह उनके समुदाय को आरक्षण की मांग सरकार की ओर से पूरी नहीं किये जाने पर 20 फरवरी से अनशन करेंगे लेकिन हार्दिक ने गुरुवार को ही खाना-पानी छोड़ दिया.
 
मुख्यमंत्री को लिखा पत्र 
हार्दिक ने यह कदम उस समय उठाया है जब उनके करीबी सहयोगियों ने आरक्षण मुद्दे पर आनंदीबेन पटेल को एक पत्र लिखा और बातचीत करने की इच्छा व्यक्त की.तीनों करीबी सहयोगियों में केतन पटेल, चिराग पटेल और दिनेश बंभानिया शामिल हैं. ये तीनों भी राजद्रोह के मामले में सलाखों के पीछे बंद हैं.
 
‘हार्दिक को थोडा संयम दिखाना चाहिए’
वहीं पटेल समुदाय के एक अन्य प्रमुख संगठन सरदार पटेल ग्रुप के अध्यक्ष लालजी पटेल का कहना है कि हम हार्दिक से मिलने के बाद ही उनके अनशन पर कोई टिप्पणी करेंगे. इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि जब हम राज्य सरकार से बात करने के लिए समिति बना लिए थे तो हार्दिक को थोड़ा धैर्य का परिचय देना चाहिए था. 

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