नई दिल्ली. मुंबई हमलों के आरोपी डेविड हेडली द्वारा इशरत जहां को लश्‍कर आतंकी बताए जाने के बाद अब पूर्व आईबी स्पेशल डायरेक्टर राजिंदर कुमार ने इस केस में नया खुलासा किया है. राजिंदर का कहना है कि यूपीए सरकार को इशरत के लश्कर कनेक्शन की पूरी जानकारी थी. लेकिन पद का लालच देकर सरकार ने खुफिया रिपोर्ट दबाने की कोशिश की. राजिंदर ने यह भी बताया कि उस सयम उन्‍हें मोदी के खिलाफ झूठा बयान देने के लिए यूपीए सरकार ने बड़ा लालच दिया था.
 
‘मोदी के खिलाफ सबूत पेश कर सके UPA सरकार’
राजिंदर ने यह खुलासा एक अंग्रेजी अखबार से बात करते हुए किया. राजिंदर के मुताबिक उन्‍हें और अन्‍य अधिकारियों पर सीबीआई ने दबाव बनाया था कि वो उनके मोहरे बन जाएं ताकि उस समय की सरकार के मुख्‍य विरोधी को जेल में डाला जा सके. लेकिन वो नहीं मानें और कभी झूठे सबूत नहीं दिए. राजिंदर के अनुसार यूपीए सरकार चाहती थी कि हम ऐसा बयान दें जो उस समय की यूपीए सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन चुके गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सबूत के तौर पर उपयोग किए जा सकें.
 
‘कोर्ट में करेंगे अपील’
इसके अलावा राजिंदर का कहना है कि कांग्रेस के एक नेता और सीबीआई के एक पूर्व अधिकारी ने उन्हें फेक एनकाउंटर मामले में फसाने की कोशिश की थी. उन्होंने कहा कि वो इस मामले में सरकार और कोर्ट के पास दोनों लोगों के खिलाफ अपील करेंगे.
 
बता दें कि आतंकी डेविड हेडली ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए मुंबई की अदालत में बताया था कि इशरत जहां लश्कर ए तैयबा की आत्मघाती हमलावर थी. उसके इस बयान के बाद से राजनीति गरमा गई है. बीजेपी  कांग्रेस पर लगातार हमला कर रही है. 15 जून 2004 को इशरत जहां, प्राणेश पिल्लई, अमजद अली राणा और जीशान जौहर एक मुठभेड़ में अहमदाबाद पुलिस के हाथों मारे गए थे.

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