नई दिल्ली. केजरीवाल सरकार ने हाईकोर्ट को बताया है कि एडमीशन में मैनेजमेंट कोटा एक रैकेट की तरह काम करता है. दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया आज अदालत पहुंचे जहां उन्होंने कोर्ट को सरकार की ओर से कई बाते रखी. मैनेजमेंट कोटा के खिलाफ सिसोदिया ने 62 वजहें गिनवाई साथ ही बताया कि ये क्राईटेरिया गैरवाजिब भी है.
 
सिसोदिया ने कोर्ट के सामने एक सील बंद लिफाफा पेश किया जिसमें कुछ पेरेंट्स की शिकायते अदालत को सौंपी गई. दिल्ली सरकार का कहना है कि ये शिकायते कुछ पेरेंट्स की है जो मैनेजमेंट कोटा के खिलाफ कई बातें बताना चाहते है लेकिन वह अपना नाम उजागर नहीं करना चाहते हैं. 
 
क्या है मामला
 
स्कूलों में मैनजमेंट कोटा रद्द करने के दिल्ली सरकार के फैसले के खिलाफ प्राईवेट स्कूल हाईकोर्ट पहुंच गए. दिल्ली के 400 पब्लिक स्कूलों की एक्शन कमेटी ने हाईकोर्ट मे मैनेजमेंट कोटा खत्म करने के आदेश के खिलाफ याचिका दाखिल करते हुए कहा है कि दिल्ली सरकार के पास प्राइवेट स्कूलों को ऐसा आदेश जारी करने का अधिकार ही नहीं है.
 
याचिका में दिल्ली सरकार के आदेश को निरस्त करने की मांग करते हुए कहा गया है कि प्राइवेट स्कूल का मैनेजमेंट ही इसका अधिकार रखता है कि एडमिशन किस आधार पर हो. याचिका में गांगुली कमेटी की सिफ़ारिशों का भी हवाला देते हुए कहा गया है कि प्राइवेट स्कूलो की स्वायत्तता को सरकार किस आधार पर खत्म कर सकती है जबकि 2007 के नोटिफिकेशन मे खुद दिल्ली सरकार और LG  ने स्कूलों में मैनेजमेंट कोटे को 20 फीसदी तक रखा है.
 
मैनेजमेंट कोटा सबसे बड़ा घोटाला- केजरीवाल
 
नर्सरी एडमिशन पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविमद केजरीवाल ने कहा था कि मैनेजमेंट कोटा सबसे बड़ा घोटाला है. उन्होंने कहा था कि अगर स्कूल नहीं माने तो सरकार स्कूलों का अधिग्रहण करेगी. केजरीवाल ने कहा था कि ये अहम फैसला स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया को पारदर्शी और लोगों के फायदे के लिए किया गया है.

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