नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वह जब्त किए गए ड्रग्स की स्टोरेज फैसलिटी छह महीने के भीतर शुरू करे. अदालत ने कहा कि मादक पदार्थ की समस्या देश में बेहद गंभीर रूप ले चुका है. अदालत ने कहा कि मादक पदार्थों की चोरी, इसमें गड़बड़ी या फिर इसे बदले जाने संबंधी घटनाओं को रोकने के लिए इसके स्टोरेज की व्यवस्था करनी चाहिए.
 
पॉलिटिशियन भी करते हैं मदद
 
अदालत ने कहा कि तमाम सम्मेलनों व सेमिनारं के आधार पर जो स्टडी की गई है उससे यह बात निकल कर आ रही है कि ड्रग्स की समस्या ड्रग्स माफिया के पावर और ट्रांसनैशनल लिंक में गहरी जड़ें जमा चुके हैं और इसके लिए पुलिस और कई बार पावर में बैठे पॉलिटिशियन भी उन्हें पनपने में मदद करते हैं. 
 
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि उसके डायरेक्शन की मॉनिटरिंग के लिए एडमिनिस्ट्रेटिव साइड में जस्टिस की समिति नियुक्ति की जाए. अदालत ने मोहन लाल व अन्य की याचिका पर उक्त निर्देश दिया है.
 
इस मामले में सीनियर एडवोकेट अजीत कुमार सिन्हा को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है और कहा है कि मादक पदार्थ की तलाशी और उसके निपटान और नष्ट करने की प्रक्रिया के लिए प्रैक्टिकल तरीके से समीक्षा की जाए. कोर्ट ने निर्देश दिया है कि ड्रग्स जब्त किए जाने के बाद उसे तुरंत नजदीकी थाने में संबंधित अधिकारी को सौंपा जाए.

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