अमृतसर. वाघा बार्डर पर भारत की ओर से बीटिंग रिट्रीट का आयोजन किया जा रहा है. इस दौरान अच्छी खासी तादाद में वहां दर्शक मौजूद रहते हैं.

क्या है बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी

‘बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी’, जिसका गवाह बनने के लिए दोनों देशों के हजारों लोग हर रोज जुटते हैं. यह वाघा बार्डर पर हर शाम दोनों देशों के राष्ट्रीय ध्वज उतारने का अवसर है. इसकी शुरुआत 1959 में हुई थी. उसके बाद से यह बिना रुके जारी है.

1965 और 1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान इसका आयोजन नहीं किया गया था बंटवारे के बाद से सालों से तनावपूर्ण माहौल के बीच इस दिखावटी दोस्ती का प्रदर्शन होता है.

ऐसे होती है बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी

सेरेमनी की शुरुआत में आकर्षक वेशभूषा में सजे बच्चे देशभक्ति वाले गानों पर प्रस्तुति देते हैं. इसके बाद बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी करीब 156 सेकंड चलती है. इस दौरान, दोनों देशों के जवान मार्च करते हुए बॉर्डर तक आते हैं. पाकिस्तासन की ओर से रेंजर्स और भारत की ओर से बीएसएफ के जवाने इसमें शामिल होते हैं.

इस दौरान दोनों देशों के गार्ड नाक से नाक की बराबरी तक आते हैं. जवान मार्च के दौरान अपने पैर जितना ऊंचा ले जाते हैं, उसे उतना बेहतर माना जाता है. दोनों देशों के जवानों की जोशभरी आवाज और परेड की धमक से कुछ ऐसा माहौल बन जाता है कि सेरेमनी देखने वाले जोश और देशभक्ति से भर उठते हैं.

दोनों देशों के जवान जितनी बार जोर से चिल्लाते हैं, दर्शकों की भीड़ उतना ही उनका हौसला बढ़ाती है, ताकि जवान एक-दूसरे से बेहतर प्रदर्शन कर सकें. इसके बाद, जवान अपने राष्ट्रीय ध्वज को एक साथ बेहद नाटकीय अंदाज में उतारते हैं. आखिर में, जवान कभी बेहद सरलता से तो कभी बेहद गुस्से से एक-दूसरे को देखते हुए हाथ मिलाते हैं. इसके बाद दोनों देशों के दरवाजे बंद हो जाते हैं.

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