नई दिल्ली. दादरी कांड के बाद देश में चले अवार्ड वापसी के एक लंबे दौर के शांत पड़ने के बाद अब वापस किए गए अवार्ड को वापस लेने का सिलसिला शुरू हो गया है. नयनतारा सहगल और नंद भारद्वाज ने अलग-अलग वजह बताकर साहित्य अकादमी अवार्ड वापस ले लिया है.

अवार्ड वापसी की शुरुआत करने वालों में से एक देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की रिश्तेदार नयनतारा सहगल ने यह कहकर अवार्ड वापस ले लिया है कि साहित्य अकादमी के पास दिए गए अवार्ड को वापस लेने का कोई प्रावधान नहीं है.

सहगल ने अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स से बातचीत में कहा, “अकादमी ने पत्र भेजकर बताया कि दिया गया अवार्ड वापस लेना उनकी नीति के खिलाफ है इसलिए वो अवार्ड दोबारा भेज रहे हैं. मैं अवार्ड के पैसे समाज के काम में खर्च करूंगी.”

राजस्थानी साहित्यकार नंद भारद्वाज ने अवार्ड वापस लेते हुए कहा है, “साहित्य अकादमी ने हमारी चिंताओं पर जो कदम उठाए उनसे संतुष्ट होकर मैं अवार्ड वापस ले रहा हूं.”

अशोक वाजपेयी अवार्ड वापस लेने को तैयार नहीं

दूसरी तरफ साहित्य अकादमी अवार्ड लौटाने वाले अशोक वाजपेयी अब भी अपना अवार्ड वापस लेने को तैयार नहीं हैं. वाजपेयी ने कहा, “मुझे अकादमी का पत्र मिला है लेकिन मुझे नहीं लगता कि साहित्य अकादमी का काम-काज एक स्वायत्त संगठन जैसा हो पाया है. इसलिए मुझे नहीं लगता कि अवार्ड वापस नहीं लेने के अपने फैसले पर मुझे दोबारा विचार करने की जरूरत है.”

साहित्य अकादमी के अध्यक्ष विश्वनाथ त्रिपाठी ने उन सारे 40 साहित्यकारों को अकादमी के फैसले की सूचना पत्र लिखकर दी है जिन्होंने अपने-अपने अवार्ड लौटा दिए थे. इस पत्र में अकादमी ने सबसे यही कहा है कि उनके पास अवार्ड वापस लेने का कोई नियम नहीं है.

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