नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर लंबी सुनवाई में कई निर्देश दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कंस्ट्रक्शन साइट पर हो रहे प्रदूषण को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं.
 
जुर्माने की राशि बार बार बढ़ाई जाए
 
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ रहे प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया है कि इसके लिए क्या प्रयास किए जा रहे है. जुर्माने की राशि पर कहा कि साइट पर प्रदूषण के चलते जुर्माने की राशि 50 हजार रुपये है जो की काफी नहीं है इसिलए बार-बार साइट को चेक किया जाए और हर बार जुर्माना बढ़ा दिया जाना चाहिए. साथ ही डे टू डे चेकिंग की जाए. जहां भी नियम का उल्लंघन होता है उस बारे में रिपोर्ट किया जाए और जो भी जिम्मेदार अधिकारी हैं उनके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा.
 
वैक्यूम क्लिनर से की जाए सफाई
 
सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार ने बताया कि एक अप्रैल से दिल्ली की सड़कों पर उड़ रहे डस्ट की सफाई वैक्यूम क्लिनर से होगी. इसके लिए उम्दा किश्म के क्लियर लाए जा रहे हैं. तब कोर्ट ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि वैक्यूम क्लिनर से सही तरह से सफाई हो ऐसा न हो कि इस दौरान और डस्ट उड़ने लगे. डस्ट मैनेजमेंट सही तरह से करने का निर्देश दिया गया.
 
बदरपुर थर्मल को बंद करने पर सख्ती
 
सुप्रीम कोर्ट ने बदरपुर थर्मल पावर बंद करने के सवाल पर एनटीपीसी को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार ने पहले से आग्रह किया था कि बदरपुर थर्मल पावर बंद किया जाए क्योंकि इस कारण प्रदूषण होता है. कोर्ट ने इस मामले में एनटीपीसी को नोटिस जारी किया है.
 
सीएनजी स्टेशन 31 मार्च तक
 
सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआर इलाके में 10 डिस्ट्रिक्ट में सीएनजी पंप के बारे में सवाल किया. सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने कोर्ट को बताया कि 31 मार्च तक सीएनजी स्टेशन लगाया जाएगा. हालांकि उन्होंने कहा कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट सीएनजी में कन्वर्ट नहीं हो रहा है जबकि पीक आवर में इसके रेट में छूट देने की भी बात है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की दलील को रेकॉर्ड पर लिया और कहा कि 31 मार्च तक 104 सीएनजी स्टेशन लगाए जाएं.
 
बीएस-6 की मियाद 2020 तक
 
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि वह यूरो-6 ( बीएस-6) 2020 तक लागू कर देगा. पहले यह 2013 तक कन्वर्ट होना था लेकिन इसे 2020 तक कन्वर्ट कर लिया जाएगा और इस पर 28 हजार करोड़ की लागत आएगी.

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