हैदराबाद. हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में आत्महत्या करने वाले रोहित वेमुला पहले दलित पीएचडी स्कॉलर नहीं हैं. पिछले 10 सालों में 8 दलित इसलिए आत्महत्या कर चुके हैं.

हैदराबाद के शिक्षाविदों का मानना है कि हैदराबाद विश्विद्यालय में हो रही आत्महत्याएं निचले समुदाय के छात्रों के खिलाफ मौजूद भेदभाव को स्पष्ट करती हैं. हैदराबाद विश्विद्यालय के छात्र यूनियन के अध्यक्ष जूहैल केपी का कहना है, “आठ आत्महत्याएं कोई साधारण बात नहीं है, लेकिन विश्विद्यालय फिर भी नहीं जगा है.” 2013 में एक पीएचडी. स्कॉलर एम वेंकेटेश ने परिसर में दलित छात्रों के खिलाफ भेदभाव होने के कारण आत्महत्या कर ली थी.

विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में हो रही दलित आत्महत्याओं के लिए शिक्षाविद् और छात्र, शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता और पढ़ाई के लिए शिक्षा प्रणाली की तरफ से कोई मदद नहीं मिलने को जिम्मेदार मानते हैं. इस कारण अक्सर कई छात्रों को बीच में से अपनी पढ़ाई भी छोड़नी पडती है.

2008 में स्कूल ऑफ फिजिक्स के पीएचडी स्कॉलर स्नेथिल कुमार ने अपने हॉस्टल कमरे में पर जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी. इस केस में पाया गया कि उनके बैकलॉग्स की वजह से उनकी छात्रवृत्ति रोक दी गई थी. जिससे परेशान होकर उन्होंने ये कदम उठा लिया था. इसके अलावा पिछले 10 सालों में कई दलित छात्रों ने अलग-अलग कारणों से खुदकुशी है

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