कराची. पाकिस्तान की एक आतंकवाद रोधी अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को बलूच नेता नवाब खान बुगती की 2006 में हुई हत्या के मामले में बरी कर दिया. बुगती परिवार की तरफ से मुकदमा लड़ रहे वकील ने बताया कि मामले को वे उच्च अदालत में ले जाएंगे. 
 
आतंकवाद रोधी अदालत ने मरहूम नवाब अकबर खान बुगती के बड़े बेटे जमील अकबर बुगती की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने डेरा बुगती में दफन शव को फिर से निकलने की मांग की थी, ताकि वे पुष्टि कर सकें कि उस कब्र में दफन शरीर उनके पिता का ही है. 
वहीं, एक अलग याचिका में बुगती ने अदालत से संसदीय समिति के उन सदस्यों को बुलाने की मांग की थी, जिन्होंने मार्च 2005 में डेरा बुगती में हुई हिंसा जिसमें दर्जनों लोग मारे गए थे, के तुरंत बाद अकबर बुगती से मुलाकात की थी. 
 
जमील बुगती ने डेरा बुगती थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर में जनरल परवेज मुशर्रफ, पूर्व मुख्यमंत्री मरहूम जाम मुहम्मद यूसूफ, पूर्व गृह मंत्री आफताब शेरपाओ और पूर्व गृह मंत्री मीरमोहम्मद शोएब नौशेरबानी का नाम दिया है.
 
इस मामले में पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ पर जनवरी 2015 में अभियोग चलाया गया था. वे उस वक्त अपनी बेटी के साथ कराची में रह रहे थे, जहां नौसेना के अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था. उनकी अनुपस्थिति में मामले की सुनवाई की गई. मुशर्रफ को उनके शासनकाल के दौरान दर्ज कई प्रमुख मामलों में जमानत मिली हुई है. इसमें 2007 में बेनजीर भुट्टो की हत्या, लाल मस्जिद पर आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई और जजों की नजरबंदी प्रमुख है.
 
बलूच नेता अकबर बुगती पाकिस्तानी आर्मी के ऑपरेशन में 26 अगस्त 2006 में बलूचिस्तान के कोहलु जिले के तारातानी के बीहड़ पहाड़ियों में मारे गए थे. बुगती ने प्रांतीय स्वायत्तता और बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों में ज्यादा हिस्सेदारी के लिए सशस्त्र अभियान का नेतृत्व किया था. बलूचिस्तान के मुख्य नेता के मौत के विरोध में पाकिस्तान के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन भड़क उठे थे.

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