नई दिल्ली. चेन्नई के एक आभूषण विक्रेता को बीमा कराने से पहले नियम और शर्तों को अच्छे से न पढ़ना भारी पड़ गया है. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया जिसमें कोर्ट ने फैसले में साफ कहा कि अगर गहने तिजोरी में नहीं रखे गए है तो उनका बीमा राशि नहीं दी जाएगी.
 
सुप्रीम कोर्ट ने बीमा कंपनी की याचिका स्वीकार करते हुए राष्ट्रीय उपभोग्ता विवाद निवारण आयोग का 36 लाख रुपए दूकानदार को देने का फैसला रद्द कर दिया.
 
दरअसल बीमा कंपनी ने अपनी शर्तों में लिखा है कि अगर गहने तिजोरी में ना रखकर बाहर डिस्प्ले में रखे हो और चोरी हो जाए तो उनका कोई क्लेम नहीं दिया जाएगा. 
 
दुकानदार ने की थी ये दलील
 
गहनों की चोरी और क्लेम न मिलने पर परेशान दुकानदार ने कहा कि इन्शोरेन्स पेपर साइन करते हुए उसने इस बात पर ध्यान नहीं दिया की गहने को रात में तिजोरी में ही रखने पर क्लैम मिलेगा क्योंकि वो बहुत छोटे में लिखा था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दुकानदार का फर्ज था कि उसे गहने डिस्प्ले की बजाय तिजोरी में रखने चाहिए थे.
 
कब घटी थी घटना
 
मामला 2 जून 1995 की रात का है जब चोरों ने सेंधमारी कर 40 लाख के गहने लूट लिए थे. उसके बाद दुकानदार ने इन्शोरेन्स कंपनी से क्लैम मांगा था. लेकिन ये कहते हुए कंपनी ने इंकार कर दिया कि क्योंकि रात के वक़्त गहने तिजोरी में न रख कर डिस्पले में रखा गया था इस लिए क्लैम नहीं मिलेगा.

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