गांधीनगरः गुजरात में गिर के जंगल में 12 शेरों की मौत हो जाने के बाद वन विभाग में इसको लेकर हड़कंप मचा हुआ है जिसमें विभाग के शीर्ष अधिकारियों का दावा है कि शेरों के दो समूहों के बीच आठ दिनों तक चली लड़ाई के बीच शेरों के बीच इलाके में प्रभुत्व स्थापित करने या एक दूसरे से बचने की कोशिश में छिपने के चलते इन शेरों की मौत हुई है जबकि दूसरी तरफ इन शेरों की मौत बीमारी के कारण होना बताया जा रहा है. लेकिन दोनों दावों के बीच गिर के जंगलों में शेरों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है क्योंकि गिर में पाए जाने वाले बब्बर शेर पूरे एशिया में सिर्फ गुजरात में ही मिलते हैं.

गिर में मारे गए शेरों में से 6 शेर के बच्चों, तीन शेरनियों और दो शेरों के शव गिर जंगल की डिविजन के पास के वन्य क्षेत्र दालखनिया में 12 सितंबर से 19 सितंबर के बीच बरामद हुए थे. जिसके बाद वन विभाग ने एक प्रेस वार्ता की जिसमें गुजरात की फॉरेस्ट फोर्स के प्रमुख जीके सिन्हा ने शेरों की मौत पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक इन शेरों की मौत के पीछे तीन वजह सामने आई हैं जिसमे पहला लड़ाई, दूसरा भुखमरी और तीसरा लंग फेलियर है. जिसमें से एक शेर और दो शेरनियों की मौत लंग फेलियर के चलते हुई है.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिन्हा ने कहा कि शेरों के बीच हो रही लड़ाई से बचने का प्रयास करते हुए एक शेर और दो शेरनियां छुपने की कोशिश कर रही थीं. लेकिन इसके साथ उन्होंने यह भी कहा कि लड़ाई के दौरान 11 शेरों की मौत थोड़ा असामान्य है लेकिन पोस्टमार्टम की रिपोर्ट यही कहती है कि 11 शेरों की मौत का मुख्य कारण चोट लगना ही है.

जबकि शेरनियों की मौत के मामले पर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि अगर शेरों की लड़ाई हो भी रही होगी तो शेरनियों की इस लड़ाई में कोई भूमिका नहीं होगी क्योंकि वह लड़ रहे शेरों से एक उचित दूरी बनाकर रखती है. वन विभाग के इस अधिकारी के बयान बाद सिन्हा का बयान संदेह के घेरे में आ गया है. फिलहाल राज्य सरकार की तरफ से 12 शेरों की मौत पर जांच के आदेश दिए जा चुके हैं.

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