श्रीनगर. चरमपंथी अलगाववादी नेता मसर्रत आलम को जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट से बेल मिल गई है. मसर्रत को घाटी में पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाने के लिए अरेस्ट किया गया था. मसर्रत को इसी साल अप्रैल में जेल में बंद किया गया था.
 
हाल ही में 25 नवंबर को जब हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े ने संगठन की संरचना में फेरबदल  किया था, तब उसे संगठन का नायब नियुक्त किया गया था. इस नियुक्ति के समय वह जेल में ही बंद था. संगठन ने सैयद अली शाह गिलानी को आजीवन अध्यक्ष नियुक्त किया गया था.
 
न्यायाधीश एम.ए. अत्तार की पीठ ने राज्य सरकार के पीएसए के तहत आलम को अरेस्ट किए जाने के आदेश को खारिज कर दिया. राज्य सरकार इसी अधिनियम के तहत इससे पहले आलम को हिरासत में रख चुकी है. हाईकोर्ट के न्यायाधीश हसनैन मसूदी द्वारा इसी साल अगस्त में दिए गए आदेश पर जम्मू के कोठबलवल जेल से रिहा किए गए आलम को सितंबर में दोबारा अरेस्ट कर लिया गया था.
 
बता दें कि इसी साल एक मार्च को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और बीजेपी की गठबंधन दल की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने आलम को रिहा करवा दिया था. आलम के नेतृत्व में इसके बाद अप्रैल में निकाली गई एक रैली के दौरान पाकिस्तान का झंडा लहराए जाने पर अधिकारियों ने उन्हें पीएसए के तहत अरेस्ट कर लिया था और कोठबलवल जेल भेज दिया था.

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