अहमदाबाद. देश और संसद में असहिष्णुता के मुद्दे पर जारी बहस के बीच राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने साबरमती आश्रम में कहा कि भारत की असल गंदगी गलियों में नहीं, बल्कि हमारे दिमाग में है. दिमाग को साफ करने की जरुरत है. उन्होंने आश्रम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान महात्मा गांधी की सोच का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने एक समावेशी राष्ट्र की कल्पना की थी जहां देश का हर वर्ग समानता के साथ रहे और उसे समान अधिकार मिले.
 
उन्होंने कहा, ”अहिंसा नकारात्मक शक्ति नहीं है और हमें अपनी सार्वजनिक अभिव्यक्ति को सभी प्रकार की हिंसा, शारीरिक के साथ-साथ, मौखिक से मुक्त करना चाहिए. केवल एक अहिंसक समाज ही हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में खासकर वंचित लोगों समेत सभी वर्गों के लोगों की भागीदारी सुनिश्चित कर सकता है.” राष्ट्रपति इन दिनों गुजरात की अपनी पहली तीन दिवसीय यात्रा पर हैं.
 

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