नई दिल्ली. अयोध्या में अब तक मंदिर मस्जिद का विवाद था जिसे शिया वक्फ बोर्ड ने शिया सुन्नी और हिंदु के त्रिकोणी विवाद में  बदल दिया है. शिया वक्फ बोर्ड ने अयोध्या की बाबरी मस्जिद पर सुन्नी वक्फ बोर्ड के दावे को झूठा बताते हुए मामले को सुलझाने के लिए जमीन आसमान एक करने की बात कही है. शिया वक्फ बोर्ड के उत्तर प्रदेश के चेयरमैन वसीम रिजवी ने पिछले महीने आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर से मुलाकात की थी जिसके बाद हिंदु और मुसलमानों का मन टटोलने के लिए अयोध्या भी गए जहां उन्होंने कबूल किया कि उनके पास कोई फार्मूला ही नहीं है.वहीं शिया वक्फ बोर्ड के वकील एमसी धींगड़ा का कहना है कि बाबरी मस्जिद पर निर्णय लेने का सुन्नी वक्फ बोर्ड को कोई हक नहीं है.

वहीं शिया वक्फ बोर्ड ने मामले को सुलझाते हुए बाबरी मस्जिद पर अपना हक बताया है. साथ ही कहा है कि मंदिर अयोध्या में ही बनाया जाए और बाबरी मस्जिद को लखनऊ में शिफ्ट किया जाए. दरअसल लखनऊ के घंटाघर के सामने शिया वक्फ बोर्ड की जमीन है और उसपर मस्जिद बनाने के लिए यूपी सरकार को प्रस्ताव भेजा है. यूपी सरकार की मंजूरी के बाद मस्जिद बनाया जाएगा जिसका नाम मस्जिद-ए-अमन रखा जाएगा. शिया वक्फ बोर्ड का दावा है कि राम जन्म भूमि न्यास और वीएचपी के नेताओं का समर्थन है. वसीम रिजवी का कहना है कि शिया वक्फ बोर्ड और हिंदु पक्ष एक प्लेटफार्म पर हैं और हमने अपनी बात को अदालत के सामने रख दिया है.

हालांकि शिया वक्फ बोर्ड का ये फार्मूला न हिंदु धर्मगुरुओं को पसंद है न ही शिया धर्म गुरूओं को ऐसे में सवाल बड़ा है कि क्या शिया वक्फ बोर्ड सच में मामले को सुलझाना चाहता है या सिर्फ शिगूफा उड़ा रहा है?

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