नई दिल्ली. कांग्रेस ने 22 साल में पहली बार गुजरात की सत्ता में वापसी के लिए पूरा जोर लगाया है. कांग्रेस के चुनाव प्रचार की कमान राहुल गांधी ने पूरी तरह अपने हाथों में ले रखी है. जातिगत समीकरणों से लेकर सॉफ्ट हिंदुत्व तक का प्रयोग राहुल गांधी कर रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गढ़ में उनके विकास मॉडल पर सवाल भी उठा रहे हैं, लेकिन राहुल गांधी की टीम की एक चूक उनके सभी सवालों पर भारी पड़ती नजर आ रही है.

राहुल गांधी ने 29 नवंबर को प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर में दर्शन किया था, जहां उनकी एंट्री गैर हिंदुओं वाले रजिस्टर के जरिए हुई. इस विवाद ने इतना तूल पकड़ा कि शाम होते-होते कांग्रेस के मीडिया सेल के अध्यक्ष रणदीप सुरजेवाला को फोटो दिखाकर सफाई देनी पड़ी कि राहुल गांधी ना सिर्फ हिंदू और शिव के भक्त हैं, बल्कि वो संस्कारी, जनेऊधारी ब्राह्मण हैं. राहुल गांधी ने इस विवाद से खुद को बेअसर दिखाने की कोशिश भी की. उन्होंने ट्विटर पर सवाल उठाया कि 1995 में गुजरात पर जो कर्ज 9 हजार 183 करोड़ रुपये था, वो 2017 में 2 लाख 41 हजार करोड़ कैसे हो गया? राहुल गांधी इससे पहले गुजरात में सबके लिए आवास योजना पर भी सवाल उठाए थे. राहुल गांधी के आरोपों के जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी रैलियों में गांधी-नेहरू परिवार पर गुजरात से भेदभाव करने का इतिहास याद दिलाना तेज़ कर दिया है.

बीजेपी और प्रधानमंत्री मोदी ने पहले दिन से इशारा कर दिया था कि गुजरात में मुद्दा सिर्फ गुजराती गौरव और मोदी ही होंगे. भावनाओं का ज्वार पैदा करने का मौका बीजेपी चूकना नहीं चाहती. ऐसे में राहुल गांधी के सोमनाथ दर्शन और उससे पैदा हुए हिंदू-गैर हिंदू विवाद ने गुजरात के विकास पर राहुल गांधी के सवालों को हल्का कर दिया है.

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